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Hansa Shukla

Tragedy Classics

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Hansa Shukla

Tragedy Classics

एहसान

एहसान

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सलिल और प्रमोद एक ही ऑफिस में कार्य करते थे। सलिल ऑफिस में निष्ठा से काम करता और अपने साथ काम करने वालो की यथासंभव मदद भी करता था। प्रमोद का ध्यान काम से ज्यादा बात में रहता अपनी लच्छेदार बातों के लिए वह पूरे ऑफिस में जाना जाता था किसी से उधार लेकर भूल जाना तो उसके आदत में शुमार था। प्रमोद की पत्नी अस्पताल में भर्ती थी उसके उधार लेकर वापस न करने की आदत के कारण कोई भी उसे उधार देने को तैयार नही था।

सलिल को यह बात सहकर्मियों से पता चला तो वह बीस हजार रुपये प्रमोद को देते हुये बोला जब भाभीजी ठीक हो जाये तो ये तो यह रकम मुझे वापस कर देना। प्रमोद की पत्नी स्वस्थ होकर घर आ गई तो दो माह बाद सलिल ने उसे रकम वापस करने के लिए कहा प्रमोद ने सलिल से कहा-तुम तो मेरे लिए भगवान हो सलिल तुम ना होते तो शायद आज मेरी पत्नी अस्पताल में दम तोड़ दी होती तुम्हारा ये एहसान मैं जीवन भर नही भूलूंगा दोस्त, मेरे प्रोविडेंट फण्ड से पचास हजार रुपये बस मिलने ही वाला है उससे मैं तुम्हारा कर्ज सबसे पहले अदा करूँगा। थोड़े दिन बाद पूरे ऑफिस में खबर थी कि अचानक हिर्दयगति रुक जाने से सलिल की मौत हो गई है पूरे ऑफिस में सन्नाटा था सभी सहकर्मी सलिल के मिलनसार स्वभाव और उसके द्वारा समय पर किये गए मदद को याद कर रहे थे,

प्रमोद भी सोच रहा था जाते-जाते भी सलिल मुझ पर एहसान कर गया उसके घर और ऑफिस में किसी को भी नही पता कि उसने मुझे बीस हजार रुपये दिए थे, वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था लेकिन आँखों मे आंसू भरकर रुंधी हुई आवाज में इतना ही कह पाया हम सब पर सलिल ने कुछ ना कुछ एहसान जरूर किया है।


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