Yashwant Rathore

Fantasy Romance


4.0  

Yashwant Rathore

Fantasy Romance


दूसरा दूसरा प्यार

दूसरा दूसरा प्यार

6 mins 163 6 mins 163

प्रीति का आज आफिस का पहला दिन हैं।

ब.ए. अभी हुआ ही हैं, सरकारी कॉलेज में क्लास रेगुलर लगती भी नहीं थी. बढ़े रूखे सूखे से 3 साल कॉलेज के निकल थे, अब घरवाले प्रीति की शादी करवाना चाहते हैं पर प्रीति शादी नहीं करना चाहती थी

उसी से बचने के लिए अपनी बुआ से कहलवाकर 6 महीने की ट्रेनिंग के लिए आफिस जॉइन किया हैं.

वो भी बुआ की तरह वर्किंग वुमन बनना चाहती थी.

 प्रीति को स्कूल के दिन बड़े याद आते है. कितनी मस्ती थी उन दिनों में. बचपन से ही गर्ल्स स्कूल में ही पड़ी थी. अपने शहर की सबसे बेहतरीन मिशनरी स्कूल में.

इतना मासूम और कच्ची कली सा रूप की स्कूल में एक लड़की ही मर मिटी प्रीति पे.

अपना बड़ा सा ग्रुप और मस्ती भरी बातें आज भी उसे सताती हैं

अब बस 4,5 फ्रेंड्स से ही टच में थी, कभी कभार ही मिलना होता हैं

पता नही कैसे काम होगा, क्या करूँगी,सोचते हुए प्रीति आफिस पहुंची.

15-16 स्टाफ का छोटा सा आफिस, प्रीति बॉस से मिलने पहुंची.

5 फुट 6.5 इंच की 20 साल की सुंदर सी लड़की, जीन्स पे ब्लैक शर्ट पहने, काले कमीज में उसका गोरा चेहरा मन मोहने लगा.

उसकी गर्दन पे लगा पाउडर , घने लम्बे बाल, फूल से नाजुक गुलाबी होठ, सुंदर नाक नक्श किसी के भी दिल की धड़कने बढ़ाने वाला था

बॉस हर्ष देखते ही मर मिटा, उसने प्रीति को अपने केबिन में ही बैठने की जगह देदी.

और ट्रेनिंग खुद ही देने का फैसला किया. प्रीति को अपनी अच्छी अच्छी बातों से हर्ष ने कुछ ही दिनों में कम्फ़र्टेबल कर दिया था.

अब प्रीति को आफिस अच्छा लगने लगा.

हर्ष की लव स्टोरीज प्रीति को आकर्षित लगती थी.

वो कहती थी सर आपने लाइफ में कितना कुछ देखा हैं, किया हैं .

लड़को से संकोच रखने वाली प्रीति धीरे धीरे अपनी बातें भी बताने लगी.

हर्ष, प्रीति को ईमानदार लगने लगा, उसने अपनी शादी, घर परिवार सबके बारे में उसे बताया.

ट्रेनिंग टेस्ट के बहाने प्रीति के हाथ पकड़ उसे समझाने लगा. पहले पहले प्रीति को अजीब लगा पर हर्ष कभी आगे नही बढा, तो प्रीति उसमें भी कम्फ़र्टेबल होने लगी.

वो भी हर्ष से बहुत बातें करने लगी, प्रीति की सगाई के लिए जिस लड़के का रिश्ता आया था ,वो फ़ोटो हर्ष को बताई.

लड़का सुंदर था, पर वो अभी शादी नही करना चाहती थी. वो भी कुछ बनना चाहती थी.

एक दिन आफिस की गणेश चतुर्थी की छुट्टी थी. प्रीति आफिस आयी तो सिर्फ हर्ष था. प्रीति हर्ष की आफिस की साफ सफाई में मदद करने लगी.

काफी काम करने के बाद, प्रीति थक सी गयी और टेबल पे रेस्ट करने लगी.

हर्ष ने सोते हुवे प्रीति को देखा, घने लंबे बालों में उसका सुंदर चेहरा कितना मासूम लग रहा था, उसके गुलाबी होठ उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे.

हर्ष ने प्रीति के सिर पे हाथ रखा , प्रीति वैसे ही लेटी रही, हर्ष का हाथ उसके कंधो पर आ गया, वो उसको सहलाने लगा, प्रीति की आँखे बंद ही थी कि हर्ष ने उसके होंठो पर अपने होठ रख दिये.

ये क्या कर रहे हो सर, बोल प्रीति एक साइड में खड़ी हो गयी.

में तुम्हे पसंद करने लगा हूँ प्रीति. आप 10 साल मुझसे बड़े हो और शादीशुदा भी आपको ये सब नही करना चाहिए.

में तुम्हे सिर्फ किस्स करना चाह रहा था और आगे कुछ नही. में गलत आदमी नही हूं.

ऐसा कुछ भी हुआ तो में आफिस नही आउंगी.

नही आगे से ऐसा कुछ नही होगा, आप घर जाओ अभी प्रीति. कल सब हो तब आना.

प्रीति रात भर सोचती रही , क्या मुझे जाना चाहिए. मै किसी को ये बात बताऊं क्या?

पर फिर घर पे टाइम निकालना होगा और शादी भी करवा सकते हैं, अब वैसे भी हर्ष कुछ ना करेगा, बुरा इन्सान नही है वो ,ये सोच प्रीति फिर से आफिस जाने लगी.

हर्ष भी कही दिन शांति से काम करता रहा, प्रीति को एहसास ही नही होने दिया कि कुछ हुआ भी था. पर बातें कम हो गयी थी ये प्रीति को अच्छा नही लग रहा था.

प्रीति ने आगे बढ़ कर बातें शुरु की. हर्ष भी नार्मल होने लगा.

धीरे धीरे हाथो का टच होना शुरू हुआ, प्रीति को बुरा न लगता था.

एक दिन इंटरवल टाइम में जब सारा स्टाफ पान सिगरेट के लिए बाहर गया हुआ था, हर्ष प्रीति को पकड़ उसके रसीले होठ चूमने लगा.

कोई आ जायेगा, डर के प्रीति उसे हटाने लगी पर हर्ष के गर्म शरीर ने प्रीति के कोमल शरीर को दीवार पर दबा रखा था. दोनों को एक दूसरे के शरीर का भार महसूस हो रहा था.

5 मिनट ऐसा चलता रहा, कुछ देर के लिए प्रीति भी खो सी गयी थी.

जब हर्ष हटा तो उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे.

मै कल से नही आऊंगी. हर्ष कुछ न बोल, अपने टेबल पर बैठ, सर टेबल पे टिका दिया.

अगले दिन प्रीति फिर आयी ,अब वो ना नही कह पाती थी, उसके हाथ भी हर्ष के गर्म शरीर को महसूस करने लग गए थे.

तीन महीने गुजर गए ,एक दिन हर्ष की बांहो में समाये प्रीति ने हर्ष को" आई लव यू "कहा. हर्ष ने भी दोहरा दिया.

तुम शादी शुदा हो हर्ष, इससे पहले की रायता फैल जाये, मुझे जॉब छोड़ देना चाहिये.

अभी तो 3 महीने और बाकी है.

3 महीने में क्या से क्या हो जाएगा, नही हर्ष में नही आऊंगी.

मै किस्स तक नही रहना चाहता, मुझे तुम्हे पूरा फील करना हैं प्रीति.

नही हर्ष ऐसा हुआ तो, में तुमसे दूर ना जा पाउंगी, तुम्हारा घर टूटेगा. बस कभी कभी तुमसे बात करूँगी, मेरा फ़ोन उठा लेना.

प्रीति ओफिस छोड़ देती हैं, घरवालो के कहने पर लड़का देखने के लिए राज़ी हो जाती हैं. 1 महीने बाद कि डेट फाइनल होती हैं.

अब तो किसी से भी शादी करलू क्या फ़र्क पड़ता हैं, मेरा प्यार तो हर्ष हैं, अपने पहले प्यार को में पूरा भी नही कर सकती.

मुझे हर्ष से क्यों प्यार हुआ.

प्रीति ने बस 2 ही बार बात की थी हर्ष से पूरे महीने में, हर्ष उसे बार बार बुलाता था और वो कमजोर नही पड़ना चाहती थी.

एक महीने बाद ,लड़के वालों की फैमिली प्रीति के घर आती हैं.

देखो बेटा, दीपक आया हैं, प्रीति की माँ बोलती हैं.

दीपक की फ़ोटो प्रीति ने देख रखी थी और हर्ष को भी बताई थी पर सामना न हुआ था.

बिना मन के प्रीति ने नज़रे उठायी.

प्रीति जितना ही सुंदर, कोमल राजकुमार सा सुंदर सा चेहरा, कुछ पल के लिए प्रीती उसमे खो सी गयी.

प्रीति पहली ही नज़र में दिल हार गई. दीपक भी प्रीति के रूप में डूब सा गया.

दोनों के लिए समय रुक सा गया था.

सब घरवाले हँसने लगे, अरे क्या हुआ तुम दोनों को. प्रीति संभलते ही सरमा के कमरे में भाग गई.

दीपक बेटा जाओ प्रीति से अकेले में बात करलो, प्रीति की मां कहती है.

तभी प्रीति के पास हर्ष का कॉल आता हैं.

प्रीति एक पल देखती हैं, फिर उसे ब्लॉक लिस्ट में डाल देती हैं.

तभी दीपक अंदर आता हैं.


दीपक की छवि उसकी धड़कने बढ़ा रही थी.

प्रीति को समझ आया कउसका पहला पहला प्यार हैं.


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