Ruchi Singh

Abstract Inspirational


4.5  

Ruchi Singh

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दीदी आपकी चॉइस बहुत अच्छी है

दीदी आपकी चॉइस बहुत अच्छी है

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"मां ! जल्दी से अच्छी सी चाय पिला दो, मेरे को बाजार जाना है।"

"अरे, अभी तू कल ही तो आई है मायके। क्या सामान घट गया।"

"मां इतने दिनों बाद अपने शहर के पुराने बाजारों में घूमने का मजा ही कुछ और है" हँसते हुए पूजा बोली।

" ठीक है तू अपनी भाभी को भी साथ ले जाना।"

पूजा कानपुर में रहती है। उसकी एक संपन्न परिवार में शादी हुई है। कल ही अपनी मम्मी के घर अलीगढ़ पहुंची है, अपने दोनों बच्चों को लेकर गर्मी की छुट्टियों में। पूजा देखने में स्मार्ट है, व बन ठन के रहती है। खूब अच्छे- अच्छे कपड़े पहनती हैं। अपने बच्चों को भी अच्छे से रखती है। पूजा के मायके में उसके समीर भइया, आरती भाभी और उसकी माँ है। पिताजी का कुछ साल पहले देहांत हो गया था। समीर भइया एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, और भाभी आरती एक गृहणी है।

आरती एक छोटे शहर की गरीब घर की लड़की है। उसका रहन-सहन बहुत सिंपल है। पर वह भी पूजा जैसे कपड़े पहनने की कोशिश करती है, क्योंकि उसका पति समीर कहता है, कि तुम अपने रहन-सहन में अंतर लाओ। अब समय के साथ अपनी चॉइस बदलो। पूजा दीदी से कुछ सीखो। आरती व समीर की शादी को 2 साल हो गया है।

पूजा और आरती बाजार जाते हैं। पूजा अपने लिए सूट देख रही थी। उसने जो सूट पसंद किया, आरती बोली "दीदी यह मैं ले लूँ। आप दूसरा इससे ज्यादा अच्छा पसंद कर लीजिए।" पूजा को बहुत बुरा लगा क्योंकि यह आज की बात नहीं जब-जब पूजा कुछ पसंद करती, आरती पहले वह लेना पसंद करें। फिर पूजा को वैसा दूसरा सूट पसंद ना आए वह मन मार के कुछ और ले लेती। आरती ही दोनों सूट के पैसे देती। पूजा को यह बात कई बार से पसंद नहीं आ रही थी।

दोनों घर पहुंची। मां ने दोनों सूट देखे। दोनों की खूब तारीफ की। बहुत ही सुंदर सूट है। आरती बोली "हाँ दीदी ने ही पसंद किए हैं।"

रात के खाने के बाद सोते समय पूजा थोड़ी नाराज़ सी दिख रही थी। मां पूछी "पूजा क्या हुआ"

पूजा गुस्से से "मां मैं जो भी चीज पसंद करती हूं। भाभी वही चीज हडप लेती है। फिर मैं जब दूसरी चीज देखती हूँ तो मुझे ज्यादा पसंद नहीं आती। मै क्या करूं मां।"

"अरे ! बेटा तू तो अपने घर में सारी चीजें अपनी पसंद की ही लेती है ना। ठीक है अगर वह तेरी पसंद का ले लेती है। तो अच्छा है, तेरी पसंद है ही इतनी अच्छी। वह हमारे घर की बहू है। अच्छे से रहेंगी तो सभी हमारी ही तारीफ करेंगे।"मां समझाते हुए बोली।

तभी आरती दूध लेकर उनको देने कमरे में आ जाती है। उनकी बातें सुनकर बोली "दीदी... आपको मैं वह सूट दे देती हूं।"

" अरे नहीं भाभी... बस मैं तो यूं ही...."पूजा अचकचाते हुये।

"नहीं दीदी .... वो समीर भी कहते हैं कि दीदी की चॉइस बहुत अच्छी है। उनकी पसंद के कपड़े लिया करो। इसलिए मैंने...."आरती संकोच के साथ, सफाई देते हुये।

पूजा के मन मे यह सुनकर इतने दिनो का मलाल व नाराजगी के सारे बादल एक झटके मे साफ हो गये। उसको अपनी सोच पर मन ही मन पश्चाताप भी हुआ। पूजा खुशी से झूम के बोली "अरे भाभी ऐसा है तो कल ही चल कर आपके लिए और सूट पसंद कर दूँगी। मुझे ये बात नहीं पता थी कि आपको मेरी पसंद पे इतना नाज़ है। हाँ भाभी... याद आया आपको भी मैंने ही शादी के लिए पसंद किया था। क्यों माँ सही कहा ना।"

मां हँसते हुए "हां बेटा सबसे पहले पूजा ही बोली थी कि आरती को ही मै अपनी भाभी बनाऊंगी।"

"देखा भाभी हमेशा से ही मेरी चॉइस अच्छी है।" पूजा की बात सुन सब हँसने लगे। आज सहसा घर मे खुशी की भीनी महक और ज्यादा महसूस हो रही थी।


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