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Rohit Verma

Abstract

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Rohit Verma

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धरती हमसे पूछ रही हैं

धरती हमसे पूछ रही हैं

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 धरती हमसे पूछ रही है-

 "कब तक मैं सूखी पड़ी रहूँ।"


 धरती हमसे पूछ रही है-

"थोड़ी बहुत तो बरसात कराओ।"


धरती हमसे पूछ रही है-

"ऐसे यूँ गन्दगी न फैलाओ।"


धरती हमसे पूछ रही है-

"इधर-ऊधर थूकते न जाओ।"


धरती हमसे पूछ रही है-

"कुछ अलग-सा संसार बनाओ।"


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