द सैंडविच बॉय

द सैंडविच बॉय

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नीति कई महीनों से कुछ उदास, परेशान, उखड़ी सी रहती है। माँ तो फिर मां है। अपने तीसरे नेत्र और सिक्स्थ सेंस से सब कुछ देख समझ रही है। नीति आजकल छुट्टी वाले दिन भी यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी चली जाती है पढ़ने। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। वापिस आते आते आठ बजे गए। मां ने मुस्कुरा कर स्वागत किया और खाना लगाने की बात कह कर किचेन में चली गयी। आज माँ ज़ोर ज़ोर से गा रही हैं"बरसात में तुम से मिले हम सजन "। नीति हैरान थी, ये बे मौसमी बरसात कैसे!। पूछा ,क्या हुआ? माँ बोली -बस यूं ही मुँह पर चढ़ गया, रेडियो पर आ रहा था। खाना खा कर नीति अपने कमरे में लेट गयी, मुँह ढांप कर। वही नीति जो दिन भर का हाल विस्तार से न सुना दे तो दम न लेती थी। माँ किचन समेट कर नीति के कमरे में आ गईं। पढ़ाई के बारे में पूछ कर एक दम बोली" अच्छा नीतू, हमसे कब मिलवा रही हो ?"

किसे?,नीतू हैरानी से बोली।

अरे वही, तुम्हारा सैंडविच बॉय !

माँ ! तुम्हें कैसे...?

माँ बीच में बात काटते हुए बोली... भई, जब तुम नहीं बताओगी तो इधर उधर से ही तो पूछना पड़ेगा। लेकिन मैं तुमसे बहुत गुस्सा हूँ। तुमने अपनी माँ को समझा नहीं।

माँ बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली।

"तुमने हमेशा मुझसे सहेली की तरह व्यवहार किया माँ,पर इस मामले में पता नहीं क्यों, मैं शेयर नहीं कर पाई। आई एम सॉरी मां।

अच्छा अच्छा। माफ किया। चल अब जल्दी से पूरी स्टोरी सुना। कहाँ मिला तुम्हे ये तुम्हारा 'सैंडविच बॉय'?कौन है ? क्या करता है

? माता पिता कहाँ रहते हैं?

माँ एक ही साँस में कई प्रश्न पूछ गयी।

नीति ज़ोर से हंस पड़ी। माँ ने कई दिनों बाद बिटिया को हंसते देखा। उसकी आंखें भर आईं।

अच्छा माँ , पहले आप बताओ किस से मेरी जासूसी करवाई?

माँ शर्माते हुए बोली... तेरी बेस्ट फ्रेंड से। लेकिन बड़ी पक्की है। सिर्फ एक लाइन बोली कि कोई सैंडविच बॉय है । चल जल्दी बता, कौन है जिसने मेरी बिटिया की नींदे उड़ा दी ?

मेरे ही डिपार्टमेंट में हैं माँ। रिसर्च स्कॉलर हैं। मेरी एक क्लास भी लेते हैं। पहाड़ी हैं।

क्या ? टीचर है तुम्हारा ?

ओहो माँ। सिर्फ 3 साल बड़े हैं मुझसे !

सुनाती हूँ तुम्हें सैंडविच बॉय से मिलने की कहानी। याद है तुम्हें 21 फरवरी , जिस दिन बड़ी तेज़ बारिश हुई थी, और मेरे पास छाता भी नहीं था। उस दिन, मैं स्टूडेंट सेंटर के बाहर खड़ी थी, बारिश से बचने के लिए। वो भी वहीं खड़ा था। मुझसे कहने लगा, चलो कॉफी पीते हैं। और एक एक सैंडविच भी। बारिश रुकने तक हमने बातें की। फिर मुझे बाइक पर घर तक भी छोड़ा। अंधेरा होने लगा था न।

बस माँ ,इतनी सी मुलाकात हुई हमारी। पर उसका यूँ फिक्र करना मुझे बड़ा अच्छा लगा। अब हम अक्सर मिलते हैं। सच्ची माँ, बड़ा अच्छा लड़का है। एक ही सांस में नीति ने उसके बारे में सब कुछ बता दिया।

मुझे पापा से डर लगता है। आप बात करोगे न?

चहकती बेटी को देख माँ के दिल को ठंडक मिल गयी। पर फिर छेड़ने के अंदाज़ में बोली.. न बाबा। तेरे पापा से तो मुझे भी डर लगता है। चल... इतना कर दूंगी कि भूमिका बांध दूंगी। अपने सैंडविच बॉय की कहानी तो तू ही सुनाना। गुड नाईट।

माँ दरवाज़ा बंद कर चली गईं।

एक बार फिर दरवाज़े से अंदर गर्दन निकाल कर बोली " मुझे तो ठीक लग रहा है तेरा ये सैंडविच बॉय। पापा को भी मना ही लूंगी।"

"मुझे भी" माँ के ऊपर से गर्दन निकाल कर पापा बोले। मैंने सब सुन लिया है।

नीति ने शरमा कर रजाई मुँह पर खींच ली और भीतर से ही बोली... मेरे पास दुनिया के बेस्ट मम्मी पापा हैं, लव यू एंड थैंक्यू।


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