चरित्रहीन शिक्षक
चरित्रहीन शिक्षक
मंगलू ....अरे ओ... मंगलू ....तूने कुछ सुना क्या......?? साइकिल से उतरते हुए कन्हैया ने उससे पूछा..
अरे पहले तनिक सांस ले ले... और फिर आराम से पेड़ के नीचे... मेरे पास बैठकर तसल्ली से बता तू क्या कहना चाह रहा है...!
फूली हुई सांस से ही कन्हैया ने कहा... अरे मंगलू आज तो गजब ही हो गया... मैंने उड़ते उड़ते खबर सुनी कि... मास्टर साहब सिंह पर पॉक्सो लगा दी गई और वह भी तेरे गांव की स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की ने...!!
तो इसमें नया क्या हुआ......
तूने सुना है तो... सही ही सुना होगा...!
सही... सुना होगा...मतलब...? तुझे खबर पता नहीं है... अरे यह तो तेरे ही गांव की खबर है... फिर भी तुझे पता नहीं... तू भी इतनी महत्वपूर्ण खबर पर गौर नहीं करता... पता नहीं कहां और किन ख्यालों में खोया रहता है......
कन्हैया तू इस खबर को महत्वपूर्ण क्यों कह रहा है..? ज़रा बताएगा मुझे....??
अरे मंगलू महत्वपूर्ण तो है ही ....अपने स्कूल के .. अरे स्कूल के क्या पूरे क्षेत्र के सबसे पढ़े-लिखे, इतने अच्छे विचारों वाले, सब को प्रोत्साहन और सम्मान देने वाले, अपने सर जी.. जेल चले गए ...वह भी इतने घिनौने आरोप में ...! मुझे तो जरा भी विश्वास ना हो रहा है कि.. अपने साहब सर ...ऐसा करेंगे..! मुझे लगता है जरूर किसी ने जलन भाव से उन्हें फंसाया है ! तुझे याद है ना जब हम लोग साथ-साथ स्कूल में पढ़ते थे ..! मैं तो प्रार्थना करता था कि काश यह स्कूल 12वीं तक हो जाए.... पर भगवान ने मेरी एक न सुनी..! सिर्फ आठ तक पढ़ कर ही पढ़ाई बंद करनी पड़ी। अरे... अब तू भी कुछ बोल ..ना.. तेरा चेहरा तो जस का तस है.... गंभीर सा .....
मंगलू ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा..... क्या बोलूं कन्हैया... मैं भी देख रहा हूं कि गांव और क्षेत्र में ज्यादातर लोग साहब सर का ही बचाव कर रहे हैं पर उस लड़की के घर वालों को तो घर, गांव का विरोध झेलना पड़ रहा है। पर कन्हैया जो हुआ बहुत अच्छा हुआ...! मगर काफी देर से हुआ...!
मंगलू की खोई खोई बातें सुनकर कन्हैया चौका ...! क्या कह रहा है मंगलू .. तू होश में तो है.... अपने गुरु के लिए तेरे मन में इतना द्वेष.... तुझे याद नहीं... तुझे कैसे अपने पास बुला कर चिपका लेते थे....??
हां.... हां... सब याद है... वह कैसे भूल सकता हूं..... कन्हैया ......तभी तो कह रहा हूं.. कि इसे जेल में डालने में देरी हो गई..!
मुझे तो लगता है मंगलू ....तू पागल हो गया.. जो अपने सबसे अच्छे सर जी के बारे में ऐसे विचार प्रकट कर रहा है !
कन्हैया... यार मैं पागल ही तो नहीं हुआ ...! काश मैं पागल हो जाता.. ... मर भी जाता तो मुझे तसल्ली मिल जाती है ! पर उन घटनाओं का क्या करूं.... जो मेरे साथ घटित हुई..!
तेरे साथ घटित हुई.... क्या घटित हुई... तू यह क्या कह रहा है ....??
हां ...हां... मैं सच कह रहा हूं.... यह सर महान नहीं... हैवान है... दोहरा मुखौटा... ओढ़े रहता है! जब से इन खबरों को सुना है मेरे दिल के पुराने जख्म हरे हो गए..! मैं भूल चुका था सब कुछ... मगर इस खबर ने ...उस नासूर को फिर से हरा कर दिया ..!!
पर मंगलू क्या सचमुच साहब सर बुरे हैं...?
तुझे भी यकीन नहीं हो रहा ना... अरे तू तो मेरा दोस्त है.. अगर तुझे ही यकीन नहीं हो रहा इस तरह की बातों पर.. तो फिर कौन यकीन करेगा इन बातों का..? लेकिन अब लोगों को यकीन करना ही होगा।
अचानक से वह उठा और गहरी सांस लेकर कन्हैया के साथ साइकिल पर दूसरे गांव पहुंचा। निम्मो के घर के बाहर साइकिल रोकते हुए कहा... काकी प्रणाम ...
खुश रहो.. मंगलू .. आओ.. कैसे आना हुआ ...??
अरे कुछ नहीं काकी निम्मो कहां है...??
अरे बेटा...कहां होगी ...जानवरों को चराने ले गई है !
तो मैं भी चलता हूं काकी ... जरूरी काम है.! निम्मो उसकी सजातीय बहन लगती थी। वह और कन्हैया नहर के पास पहुंचा.... तो देखा एक पेड़ की छाया में निम्मो और उसकी सहेली धन्नो गुटके खेल रही थी । सामने खाली पड़े फील्ड में जानवर चर रहे थे। नहर भी पास ही थी ...जिससे पशुओं की प्यास का भी समाधान नजदीक ही हो जाता था! वह और कन्हैया निम्मो के पास पहुंचे। जब निम्मो ने उसे अपने पास आते देखा तो वह उठ खड़ी हुई और बोली.... अरे मंगलू... तू इधर..अचानक कैसे..? कोई खास बात है क्या..?
मंगलू ने कहा... हां खास है ..तभी तो इधर चला आया..? तुझे पता है निम्मो... अपने स्कूल के साहब सर पर पॉक्सो लग गई..?
पोक्सो लग गई ...सुना तो था ..पर यह ..पोक्सो होती क्या है ..यह तो मैं समझ ही ना सकी। अपने संगी साथियों से भी पूछा पर किसी ने कुछ जवाब ना दिया। तू ही बता यह क्या बला है ।
अरे. तू इतना समझ ले.. नाबालिक बालकों को छेड़ने या उनके साथ गलत हरकतें करने से रोकने का नया कानून है यह..!
ओह... अब समझी.. मास्टर जी काहे जेल चले गए...? अच्छा हुआ जेल चला गया.. यह मास्टर ..! लगता है.. इसने अपनी लुच्ची हरकतें बंद ना की।
तब तक कन्हैया ने कहा... तू भी सर जी के बारे में ऐसा कहती है निम्मो... अरे मैं ही नहीं.. स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चे ...हर साल उनकी गंदी हरकतों का शिकार होते हैं ...?? तू नहीं जानता मंगलू अभी तो यह एक जेल गया है ..अगर बात खुलेगी तो... दो ...तीन और मास्टर भी.... जेल जाएंगे...??
दो... तीन....मास्टर तू यह क्या कह रही है निम्मो..?
हां... हां... ठीक कह रही हूं ... निम्मो की आंखे भर आई
लेकिन इतने बरस से अगर मास्टर लोग अंदर ही अंदर स्कूल में ऐसा दुराचार करते रहे तो किसी ने कभी कुछ कहा क्यों नहीं..?
तू नहीं जानता कन्हैया.... यह गांव है... यहां जात.. पात ऊंच नीच , सब देखा जाता है और जब कोई बालक अपने टीचर के खिलाफ कुछ कहे तो... कौन विश्वास करेगा ! कोई सबूत तो होते नहीं हैं। हम और तू अभी भी कितनी उम्र के हैं और क्या जानते हैं ...किससे क्या कहना है ...? कब कहना है ...? कैसे कहना है ....? यह भी तो नहीं जानते...! वह तो बहुत पढ़े लिखे हैं और उस पर भी ऊंची जात के..? उनके सजातीयों का क्षेत्र है और स्कूल भी ..! उनका बोलबाला है... कौन उलझे उनसे ....
तू सही कहती है निम्मो... मेरे साथ भी मुझे अकेले बुलाकर जब भी गलत हरकतें करता था.. तो हमेशा डरा कर कह देता था... किसी से कहना मत वरना तेरी और तेरे मां-बाप की खैर नहीं ....मेरे पास बहुत पैसा है... मुझे पुलिस भी कुछ ना कहेगी... मगर तेरे मां-बाप दुनिया से दूर चले जाएंगे और तू भीख मांगता फिरेगा.. । मेरा तो मन रह रह कर ईश्वर को धन्यवाद देता है। देर से ही सही शेर को सवा शेर मिल ही गया...!! अब लड़ता रहे उस आदमी से जो तेरा ही सजातीय है ... तूने उसकी लड़की पर गंदी नियत रखी...अब उसने तुझे जेल में रखवा दिया!
अब हम भी चुप न बैठेंगे निम्मो..! हम सब मिलकर इस दुराचारी टीचर की सारी करतूत उस लड़की के बापू से कहेंगे ..! जहां जैसी जरूरत होगी उसकी मदद करेंगे। निम्मो अपने भाई मंगलू के साथ उसका हाथ पकड़ कर खड़ी हो गई। उन्होंने पिछड़ी ,अगली ,व छोटी जातियों के दस पांच बालकों को एकत्र कर लिया... जिनके साथ समय-समय पर साहब सिंह ने दुर्व्यवहार किया था। गंदी नियत डालकर अध्यापन के पेशे को बदनाम किया था। अध्यापक जाति के नाम को कलंकित करके उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई । उन सभी बच्चों द्वारा उस लड़की के बापू को आप बीती बताने से उनका पक्ष और मजबूत हो गया।
धीरे-धीरे जब यह बातें समाज गांव में फैली ...तो लोगों ने साहब सिंह को अपनी नजरों से उतार दिया। उनके नाम पर थूकना शुरू कर दिया।
साहब सिंह की जमानत पर बहस हुई। परंतु विभिन्न दलीलों को सुनने के पश्चात उनकी जमानत अर्जी कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई ।समय के साथ उन्हें कठोर सजा मिली। शायद उतने बरस की ..जितने बरस से उन्होंने बच्चों को मर मर कर जीने पर मजबूर किया होगा..!
उस स्कूल में अब कोई लड़की पढ़ने नहीं जाती । लोग उस स्कूल के शिक्षकों को आज भी संदेह भरी दृष्टि से देखते हैं । साहब सिंह की कारगुजारी अन्य शिक्षकों को इतनी भारी पड़ेगी यह उन्होंने कभी सोचा भी न होगा ।
किंतु समाज में न जाने कितने साहब सिंह ऐसी ही कार गुजरिया करके खुद तो सजा पाते हैं और अन्य शिक्षकों को भी जाने अनजाने सजा दे जाते हैं। समाज और अन्य शिक्षक उनको कभी माफ न करेंगे.....?????
