चिड़िया
चिड़िया
घर में यूँ ही मैगज़ीन देख रही थी कि चिड़िया की आवाज़ आयी। जैसे वह चीत्कार रही हो।
मैंने झट बॉलकनी में जाकर देखा जो चिड़िया अमूमन चहचहाती थी आज वह अजीब सा आवाज़ कर रही थी। इधर उधर देखा। मुझे लगा चिड़िया कुछ कहना चाह रही है। क्या वह कोई परेशानी बताना चाह रही थी?
मैं थोड़ा लॉजिकल हो गयी। और थोड़ा एनालिटिकल भी...मेरा दिमाग उसकी हरकतों में रीज़निंग ढूँढने लगा। कहीं चिड़िया घरौंदे के लिए परेशान तो नहीं? लेकिन आसपास हरे भरे पेड़ दिख रहे थे। पक्का हो गया की चिड़िया घरौंदे के लिए परेशान नहीं है...
मेरा सर चकराने लगा। मैं और ज्यादा परेशान होने लगी। मेरी निगाहें फिर इधर उधर घूमने लगी मुझे वहाँ बिखरे हुए बाजरे के दाने दिखे। पक्का हो गया की चिड़िया खाने के लिए परेशान नहीं है
मैं फिर सोच में पड़ गयी। सब कुछ सही लग रहा था दाना था ... हरे भरे पेड़ थे। फिर यह चिड़िया की चीत्कार क्यों? सोचते हुए मैं खामोशी से अंदर आयी। वैसे मैं कर भी क्या सकती थी?
अंदर माँ की जोर की आवाज़ आयी शायद वह बहन को डाँट रही थी। अचानक बहन चीख पड़ी, "माँ,आप को क्या पता है ऑफिस के माहौल का और वह भी किसी प्राइवेट ऑफिस का? वहाँ सब एक से बढ़कर एक लोग होते है जो लड़कियों को घूरते रहते है। और भी न जाने क्या क्या इरादे होते है उनके।"
माँ जैसे खामोश हो गयी जैसे वह अलफ़ाज़ ढुँढ रही हो कहने के लिए 'तुम महफूज़ रहोगी.....'
अचानक चिड़िया फिर चीत्कार उठी मैं फिर बॉलकनी में भागी...अनायास मेरी निगाहें ऊपर गयी.....
आसमाँ में चील झुंड में मँडरा रही थी....
