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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Drama Inspirational

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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Drama Inspirational

छितर बितर

छितर बितर

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वो थका था, बहुत ज्यादा थका था किन्तु हारा न था।

उसने घर आकर महसूस किया कि उसके सारे अंग बिखर गए हैं।

उसे नींद आ गई थी।

ऑंखें खुली तो देखा कि उसके सारे अंग वापस आ चुके थे

माँ की गोद उसे हारने से हर बार बचा लेती थी।


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