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Reetu Singh Rawat

Abstract


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Reetu Singh Rawat

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बूढ़े माँ बाप का दर्द

बूढ़े माँ बाप का दर्द

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 बूढ़े माँ-बाप भी अब बच्चे हो गए हैं , आज मैं अपने ईश्वर और गुरु जी से दोनों हाथ जोड़ कर आज तक की अपनी सभी गलतियों के लिए जो अनजाने में ही सही की गई होगी उनके लिए माफी मांगती हूँ और आप सबसे भी यही कहना चाहूंगी कि हम सब जान बुझकर कभी किसी को तकलीफ नही देते है फिर भी गलतियां तो कई बार करते ही है इसलिए जब हम किसी को दुःख देते है तो उसका का भुगतान हमे ही करना होता है बस समय नहीं पता होता है और भुगतान गलती से 100 गुना बड़ा होता है और यह बात भी सच है कि गलती समय पर समझ कम ही आती है जब आती है तो समय निकल चुका होता है। साथ ही कर्मो का हिसाब सब को किसी न किसी रूप में चुकाना ही पड़ता है जब समझ आती है तो बहुत देेेर हो चुकी होती है और अपने घर बाहर दोनों जगह हम किसी न किसी रूप में गलती करते रहते हैं। अपने गरूर में दूसरे की भावनाओं की कद्र करना भूल जाते हैं। यह शुरुआत हम सबसे पहले अपने ही घर से शुरु करते है।  

   हम अपने बड़े बुजुर्गों के साथ अच्छा व्यवहार नही करते उनकी बातों को न समझकर उन पर हमेशा चिलाते है। उनसे ऊंची आवाज़ में बात करते है उनको बात -बात पर जलिल करते हैं उनका ध्यान नही रखते है बस अपनी जिम्मेदारी का बोझ समझकर घर में रखते हैं और अगर परेशान हो जाए तो सोचते है कि कब इन से पीछा छूटेगा कब ये मरेंगे जब हम उनको दुःख देते है तो सोचो उनके दिल पर क्या बीतती होगी उनकी आँखों से निकलने वाले आंसू और जब उनका गला दर्द से भरा जाता होगा और आवाज बाहर नहीं आती होगी तो वो हमारे बारे में क्या सोचते होंगे कि ये वहीं बच्चे हैं जिनको हमने अपना पेट काट काट कर इन्हें क़ाबिल बनाने के लिए हम जवान से कब बूढ़े हो गए हमें पता ही नहीं चला सोचा इनकी सफलता ही हमारी जिंदगी की सफलता होगी पर आज हम ही इनके लिए बोझ है।

भगवान हमें ऐसी जिंदगी से अच्छा है कि मौत मिल जाए क्योंकि इंसान सिर्फ हारता ही अपने बच्चों और अपनों से है और बच्चे भूल जाते है कि ये माँ बाप ही है जिन्होंने हमें अच्छी जिंदगी और जीने के काबिल बनाया है हम जितना प्यार अपने बच्चों से करते है क्या उतना प्यार अपने बूढ़े माँ बाप से भी करते है शायद 90% नही होगा क्योंकि माँ बाप पर कम ही लोग ध्यान देते हैं और जिम्मेदारी न के बराबर समझते हैं और अगर माँ-बाप बीमार हो जाए तो बच्चों पर खास फर्क नही पड़ता है बस एक जिम्मेदारी के साथ इलाज करते है और उसमे भी सोचते हैं कि कम पैसों में या मुफ्त में ही इनका इलाज हो जाए तो अच्छा है और अगर अपनी औलाद बीमार हो जाए तो अच्छे से अच्छा डॉक्टर खोजने लगते है। सोचो जो माँ-बाप अपनी जिंदगी देकर जीवन देते है और जीने के काबिल बनाते है उनके लिए हम सोच कर कार्य करते हैं माँ-बाप की जगह ईश्वर से भी ऊँची है ईश्वर एक विश्वास और माँ बाप एक सत्य है जो ईश्वर के समान है। यह बात तब समझ आती है जब हमारे बच्चे हमारे साथ वैसा ही करते है तब हमें माँ बाप की याद आती है इसलिए माँ- बाप का दिल मत दुखों और साथ में किसी भी इंसान का चाहे बच्चा बुढ़ा कोई भी हो। किसी को बुरा मत कहो। 

 इंसान को तो क्या जानवर से भी बुरा व्यवहार नही करना चाहिए ,दर्द सब को होता है इसलिए जो बोयगे वो ही काटेंगे यही सृष्टि का नियम है। कर्म ही फल है खट्टा या मीठा मान या अपमान समय समय पर सब यही मिलता है। जिस प्रकार घड़ी की सुई घूमती है और उसी रूप में पैसा और औलाद घड़ी की सुई के चक्कर के समान है। बात समझ देर से आती है पर जिस दिन समझ आ जाए समझ लेनी चाहिए क्योंकि कर्म का फल कम ही सही पर कुछ तो मिलेगा।

  बस आप सब से इतना चाहती हूँ कि माँ- बाप और बड़े- बुजुर्गों का सम्मान करे साथ ही सम्मान से बात करे। उन्हें हमारे प्यार की जरूरत अधिक है। अब हमारे बुजुर्ग भी हमारे बच्चों की तरह हो गए है अपने बच्चों की तरह उनका ध्यान दिल से रखें। तभी उनकी आत्मा दिल से आशीर्वाद देगी और यह हमारा कर्तव्य भी है। अगर हम सब मिलकर सोचे तो कोई माँ- बाप दुखी नही रहेगा और इस धरती माँ की गोद में कोई अनाथ आश्रम न होगा ( धरती माँ की गोद से प्यारी मेरी माँ की गोद है ) जो बचपन की मीठी यादों से मेरे कण कण को खुशियां से भरती है पापा की डांट एक कड़वी दवाई की तरह एक सफल जीवन देती है। माँ-बाप न होते तो जीवन न होता, जीवन न होता तो हम कहा होते जिसने ये दुनिया बनाई उसने जीवन में सब रंग रिश्तों में घुल दिए इसलिए रिश्तों को प्यार के साथ सँझोकर रखे। रिश्ते प्यार की भूखे के समान होते है ऊपर वाला रिश्ता बनाता है और हम कितनी एहमियत से रिश्ते निभाते है यह हम पर है। रिश्ते ईश्वर के घर से तय होकर आते है और धरती पर हम उस रिश्ते के नाम से पुकारे जाने लगते है। हर रिश्ते के अनेक रूप है प्यार सब से अनमोल शब्द है जो मान- सम्मान के साथ रिश्तों को दिलो की एक खूबसूरत डोर में बंधकर संसार में चलता है। और अगर मैंने गलती से किसी का दिल दुखाया हो तो माफी चाहूंगी। जय हिंद जय भारत 


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