Pawan Gupta

Horror Thriller


4.0  

Pawan Gupta

Horror Thriller


बुकशेल्फ में आत्मा

बुकशेल्फ में आत्मा

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मुझे किताबों का बहुत शौक है, इतना की हमारे घर में एक किताबों का कमरा भी है जिसे हमने स्टडी रूम बनाया हुआ है, किताबें इतनी है कि इधर उधर हो जाती है। कई दिनों से मैं एक बुकशेल्फ लेना चाहती थी, पर हमेशा आलस करती थी, एक दिन मैं मार्किट गई, वहां मैंने फर्नीचर मार्किट में एक एंटीक  

बुकशेल्फ देखा। ये बुकशेल्फ सेकंड हैंड था पर बहुत ही खूबसूरत लगा, उसके किनारों पर की गई नक्कासी मेरी पलकों को झपकने ही नहीं दे रही थी।उस दुकानदार ने बताया की ये बुकशेल्फ काफी पुराना है और इसकी लकड़ी बहुत मज़बूत है।

भैया इसका क्या रेट होगा... "मैंने कहा "

बहन जी आपके लिए 25000 रुपये "दुकानदार ने कहा "

भैया पागल तो नहीं हो गए हो सेकेंड हैंड बुकशेल्फ के लिए इतने पैसे  ...."मैंने कहा "

बहन जी ये एंटीक पीस है, बहुत पुराना इसका रेट तो बहुत ज्यादा होगा अगर यही विदेश में बेचा जाये तो .... "दुकानदार ने कहा "

भैया फिर आप इसे विदेश में ही बेच दो .. " मैंने बोला और जाने लगी "

एक....एक.... मिनट बहन जी आप तो गुस्सा हो गई आप ही बताओ आप कितना रेट दोगी        

"दुकानदार ने रोकते हुए बोला "  

भैया मैं 15000 रुपये से ऊपर नहीं दूंगी " मैंने कहा "

क्या बहन जी एक बुकशेल्फ का आधा रेट कम कर दी इतने में मैं नहीं दे पाउँगा अगर आपको सच में लेने की इच्छा है तो फूल एंड फाइनल 20000 रुपये लगेंगे, बाकी आपकी मर्ज़ी...... " दुकानदार ने कहा "


बुकशेल्फ बहुत महंगा लग रहा था पर मुझे बहुत पसंद भी आया था, इसलिए मैंने खरीद लिया, मैंने दुकानदार को अपने घर का एड्रेस दिया की वो हमें होम डिलीवरी करवा दे। दुकानदार ने कहाँ की कल आपके घर बुकशेल्फ पहुंच जायेगा! उसने मुझे बुकशेल्फ का बिल देते हुए एक अजीब हँसी के साथ कहा,  ले जाओ मैडम बहुत ही एंटीक चीज है ये.....

उसकी इस हरकत से मेरे मन में हल्का सा डर हो गया पर उसे इग्नोर करते हुए मैं घर आ गई !

घर पहुंच कर अपने स्टडी रूम की सफाई की सारी किताबों को साफ़ करके एक जगह किया, फिर बुकशेल्फ के लिए एक जगह बनाई।

उस रूम में एक टेबल चेयर टेबल लैंप हर चीज का इंतज़ाम कर दिया बस अब मुझे बुकशेल्फ का इंतज़ार था।

रोहन देखेंगे तो कितना खुश होंगे उनको तो पुरानी चीज़े कितनी पसंद है, मैं उनसे आज कुछ नहीं बोलूंगी कल उनको सरप्राइस दूंगी ..

यही सब सफाई करते हुए मैं प्लान कर रही थी। 

रोहन ऑफिस से घर आये तो उनको मैंने कुछ नहीं बताया, उनको डिनर कराया और ऑफिस का हाल चाल पूछी, कुछ नार्मल बातें करके हम सोने चले गए।

अगले दिन बुकशेल्फ 11 बजे तक मेरे घर पर आ गई, मैंने कुछ मजदूरों की सहायता से बुकशेल्फ को स्टडी रूम से पहुँचवा दिया और प्रॉपर सारा सामान किताबें सब अपनी अपनी जगह पर सेट कर दी। फिर वो मजदुर कुछ पैसे लेकर चले गए, मैं बहुत खुश थी और रोहन का इंतज़ार कर रही थी, रोहन जब आये तो उनको स्टडी रूम दिखाकर सब कुछ बता दिया। बुकशेल्फ उनको भी बहुत पसंद आई, कुछ देर आज उन्होंने स्टडी रूम में अपने किताबों के साथ वक़्त भी बिताये। अगली सुबह उनके ऑफिस जाने के बाद मैं भी पूरे घर की सफाई में लग गई, सफाई करते हुए जब मैं स्टडी रूम में गई तो जो कुछ देखा ...मेरा गुस्सा 7 वे आसमान पर चला गया।

स्टडी टेबल पर बीसियों किताबें खुली पड़ी थी, रोहन कल किताबें पढ़ रहे थे, उन्होंने ही ऐसे किताबें बिखेर रखी है, आने दो उनको शाम को खबर लेती हूँ।

ये सोचते हुए मैंने पूरी स्टडी रूम की सफाई की, पूरे घर की सफाई के बाद खाना बनाई, और आराम करने चली गई। अचानक कुछ गिरने की आवाज़ से मेरी नींद खुली, जाकर देखा तो एक चूहा था जिसके भागने से एक किताब बुकशेल्फ से नीचे गिर गई थी।


अब रोहन का इंतज़ार करने लगी, जब रोहन आये तो फ्रेश हुए और रिलेक्स होके वो स्टडी रूम में आये तो मैंने कहा की किताबें पढ़ते है अच्छी बात है पर उन किताबों को वापस सेल्फ में रख दिया कीजिए। रोहन ने कहा क्या बोल रही हो मैं तो सारी किताबें सेल्फ में ही रखता हूँ।

क्यों झूठ बोल रहे हो आप बीसियों किताबें टेबल पर खुली हुई थी, और बोल रहे है आप की आप किताबें सेल्फ में रखते है, पागल बना रहे है 

"हँसते हुए मैंने कहा "

नहीं नहीं ...तुम्हारी कसम मैंने सारी किताबें सेल्फ में रखी थी, " रोहन ने कहा "   

अब मुझे डर लगने लगा, क्योंकि रोहन मेरी झूठी कसम कभी नहीं खाएंगे। कुछ देर इधर उधर की बातें करके सब नार्मल हो गया और हम खा कर सोने चले गए। अगली सुबह रोहन के ऑफिस जाने के बाद सफाई करते वक़्त वही सब दिखा। मैं तो डर गई, मैंने तुरंत रोहन को कॉल किया 

रोहन प्लीज जल्दी घर आ जाओ मुझे डर लग रहा है कल की तरह आज भी बीसीओ किताबें खुली टेबल पर पड़ी है। "ये कहकर मैं रो पड़ी "

मैं आ रहा हूँ तुम चुप हो जाओ " रोहन ने कहा "

मैं ड्रोनिंग रूम में बैठकर रोहन का इंतज़ार करने लगी, मैं बहुत ज्यादा डरी हुई थी अब शक भी हो रहा था कि बुकसेल्फ़ में कुछ प्रॉब्लम तो नहीं है।

जब से ये बुकशेल्फ हमारे घर आया है तब ये ये प्रॉब्लम है। अभी यही सब सोच रही थी तभी रोहन आ गए रोहन को देखकर मैं उनसे लिपट कर रोने लगी और सारी बात उनको बताने लगी।

शांत हो जाओ बाबा ...चलो देखते है क्या बात है " रोहन ने मुझे समझाते हुए बोले "

मैं और रोहन दोनों स्टडी रूम में गए, रोहन ने भी देखा, वहां बीसीओ किताबें खुली पड़ी थी टेबल भरा हुआ था। ये सब देखकर रोहन थोड़ी देर शांत रहे फिर कहीं कॉल करने लगे। उन्होंने किसी सी सी टीवी वाले को बुलवाकर उस रूम में कैमरा लगवा गया, अब मन में हम दोनों को शांति मिली। जिस कारण से भी ये सब हो रहा है अब कैमरे में सब रिकॉर्ड हो जायेगा अब हमें रात का इंतज़ार था। रात हुई हम खा पी कर सो गए सुबह उठे तो सी सी टीवी फुटेज चेक किया। रिकॉर्डिंग देख के तो हमारे पैरो तले जमीन खिसक गई, वीडियो में साफ़ साफ़ दिख रहा था कि किताबें खुद ब खुद हवा में उड़ती हुई टेबल पर आ रही है फिर किताब खुलती है और एक एक करके पेज पलटते चले जाते है। फिर उस किताब को वही छोड़ कोई दूसरी किताब के साथ भी वैसा ही होता है ऐसा 15-20 किताबों के साथ हुआ और सारी की सारी किताबें वही टेबल पर खुली पड़ी रही। देख के ऐसा लग रहा था कि कोई अदृश्य शक्ति किताबों में कुछ ढूंढ रही हो, स्टडी रूम में झांक कर देखा तो सब कुछ बिखरा हुआ था।


रोहन ने कहा - ये बुकशेल्फ किस दुकान से लायी थी चलो वहां .....मैं रोहन को लेकर उस दुकान पर गई, पर ....पर वहां तो कोई दुकान थी ही नहीं।

मुझसे ये सब बर्दाश नहीं हो पा रहा था, मैं फूटफूट कर रोने लगी, चुप हो जाओ जो होना था हो गया अब शांत दिमाग से इसका सोलूशन्स ढूँढना है तुम रोना बंद करो चुप हो जाओ।" रोहन ने कहा " मुझे अचानक याद आया, मेरी सहेली निर्मला एक पंडित जी को जानते थे वो शायद हमारी मदद कर सके।

मैंने ये बात रोहन को बताया, हम दोनों निर्मला के घर चल दिए। हम निर्मला के घर पहुँचकर सारी बात उसे बताई, और पंडित जी का एड्रेस पूछा।

निर्मला हमें लेकर पंडित जी के घर गई, निर्मला ने सारी बात पंडित जी को बताई। हम सब पंडित जी को लेकर घर आये, पंडित जी ने सब कुछ ध्यान से देखा, फिर कहा मजदूरों को बुलवाकर इस बुकशेल्फ को घर से बाहर करवाओ फिर आगे क्या करना है बताता हूँ। हमने भी वैसा ही किया मजदूरों को बुलवाकर उस बुकशेल्फ को घर से बाहर कर दिया। फिर पंडित जी मंत्रों को पढ़ते हुए पूरे घर और किताबों पर गंगा जल छिड़कने लगे।

  उन्होंने कहा - मैंने इस घर को मंत्रों से बाँध दिया है, अब ये घर शुद्ध है, इसके बाद पंडित जी बहार आये और उस बुकशेल्फ पर मंत्रों के उच्चारण गंगा जल के छींटे मारने लगे। जैसे ही गंगा जल के छींटे उस शेल्फ पर पड़े वो हिलने लगा, हम सब तो डर के पीछे हट गए और वो शेल्फ हिलते हिलते गिर गया। तभी पंडित जी ने हमसे पेट्रोल माँगा, रोहन कार से पेट्रोल ले आये। पंडित जी ने उस शेल्फ पर पेट्रोल डाल कर आग लगा दी।

वो शेल्फ ऊंची ऊंची आग के लपटों के साथ जलने लगा पर उस शेल्फ के जलने पर एक बहुत ही गन्दी बदबू आ रही थी जैसे की कोई लाश जल रही हो।

पंडित जी सारा काम ठीक करके अपने घर चले गए, निर्मला भी थोड़े देर में घर चली गई और हम भी अपने घर की सफाई में लग गए।

उस दिन के बाद हमने कभी ऐसी एंटीक चीज़ नहीं खरीदी ...

.क्या आपको भी चाहिए एंटीक चीज़े तो सावधान हो जाए ......          


   


 

  


 

 


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