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KP Singh

Tragedy Inspirational

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KP Singh

Tragedy Inspirational

भिखारिन अम्मा

भिखारिन अम्मा

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आज कुछ पुराने दोस्त आ रहे थे सो मैं बहुत खुश था, उनके साथ बैठना, गप्पें लगाना, पिते हुए पुराने क़िस्से सुनना ओर सुनाना आज शाम खूब खुशनुमा होने वाली थी।

उन्ही की आवभगत की तैयारियों में लगा था कुछ लगभग शाम 8 बजे के क़रीब आने का था,इन्ही तैयारियों में उत्साहित में ATM से कुछ पैसे निकाल बाहर आ गिन रहा था तभी पास से गुजरते नाले की पुल की दिवार के सहारे बैठी एक बूढ़ी, कृशकाय, फटे चिथड़े पहने कई महीनो से नही नहाई लाचार ओरत पर नज़र पड़ी, भूख से तड़पती आशा भरी नज़रों से आँख चुराते हुए उसे अनदेखा कर निकल ही गया तभी पता नही क्यों वापस उस बुढ़िया के पास आ पूछा “अम्मा भूख लगी” बुढ़िया ने भी हाँ में सिर हिला दिया,मेने भी पास की दुकान से कुछ बिस्किट ओर चाय दिला अपने मन को सुकून दिया ओर फिर थोड़ी ही देर में दोस्तों के साथ बिजी हो अपनी मस्ती में रम गया।

अगले दिन पता नही क्यू फिर उस बुढ़िया का ख्याल आया ओर अपनी गाड़ी ले पहुँच गया ओर जाते ही पूछा “अम्मा भूख लगी हे” वापस उसने हाँ में सिर हिलाया तो आज सामने की होटल से थोड़ी सब्ज़ी ओर रोटियाँ खिला घर आ गया। 

अब मेरा लगभग रोज़ का बूढ़ी अम्मा के पास आना होता कभी खाना घर से लेकर आता, कभी चाय बिस्किट तो कभी पैसे भी दे जाता।अम्मा भी मुझे देख खुश हो जाती अब थोड़ा थोड़ा मुझे दुआ देने के अलावा भी बोलती, रोज़ सोचता बुढ़िया के लिए कुछ किया जाए तो पास के वृद्धाआश्रम में पता किया सोच रहा था बूढ़ी अम्मा को ठिकाना मिल जाए सर्दियाँ भी लगभग आ ही गई पर वृद्धाआश्रम में कुछ बात बनी, कुछ इंतज़ाम कर सकूँ इसी में लगा था इसी बीच घर से एक पुरानी कम्बल भी ले आया अम्मा के लिए, सर्दियाँ बढ़ रही थी।एक दिन अम्मा के पास से निकल ही रहा था की कुछ आदमी आए,पुछने पर पता चला कोई सरकारी योजना के विज्ञापन का होर्डिंग लगाने आए ओर मैं घर निकल आया।

उसी शाम दोस्तों के साथ बाहर निकल गया, दो तीन दिन दोस्तों के साथ मोज मस्ती में गुजरे ना बूढ़ी अम्मा का ख़याल आया ओर ना उसकी भूख ओर सर्दी का जैसे ही दो दिन बाद घर पहुँचा ओर पहुँचते ही अम्मा की चिंता सताई,बूढ़ी अम्मा के पास आज बहुत भिड़ थी,पुलिस के एक दो जवान भी खड़े थे,अनहोनी की आशंका से घबराया ओर पास गया तो देखा बुढ़िया निढाल पड़ी हैं तभी पास के सज्जन बोले भूख ओर सर्दी से तड़प के ही शायद बुढ़िया मर गई।

अपने मन में अपराध बोध को लिए ऊपर देखा था तो सरकारी योजना के होर्डिंग पर लिखा था “आया हे इस सरकार का रथ, देगा सब को भोजन ओर सर पर छत” फिर सोचा सरकार भी जिसको ना रख पाई उसे तो भगवान ही रखेगा ........


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