हाॅन्टेड बस
हाॅन्टेड बस


हाॅन्टेड बस
एक सुनसान सड़क पर एक अजीब सा भिखारी जैसे बाबा बैठा था। उस सड़क पर लिखा हुआ था, मोटे-मोटे साफ अक्षरों में कि ये सड़क खतरनाक है।
पर वो सड़क शहर को एक दूसरे शहर से बहुत कम समय में जोड़ता था इसलिए जो नहीं जानता था लोग गाहे बगाहे उस पर से चले ही आते थे और आते तो आश्चर्य करते कि ये बाबा ऐसी सुनसान सड़क पर भीख मांगने क्यों बैठे है।
दिन के वक्त तो वो कुछ नहीं बोलते थे, पर शाम में अगर कोई गाड़ी जाती तो वो चिल्लाने लगते आगे मत जाओ ख़तरा है, ख़तरा है, सब उनको पागल समझ कर ध्यान ना देते, चले जाते पर कभी वापस भी ना आते।
ऐसे ही एक दिन दो मिडिया वाले कैमरा के साथ आते है। और रोड के शुरूआत में खड़े होकर रिपोर्टिंग करते हैं, " आखिर क्या है इस भूतिया रास्ते का राज, आज मैं और श्वेता कवर करेंगे इसे, वो भी रात के बारह बजे कि आप लोगो के मन से इस रास्ते का खौफ मिटे और हमारे साथ है, ये भूतों कि गतिविधियों को मापने वाला यंत्र के-2 मीटर", रवि खत्म करता है।
"ये देखिये ये सुनसान खौफनाक मंजर, अमावस कि रात और ये क्या आपने देखा अभी मुझे लगा पीछे से कोई गया", श्वेता बोली।
" ओ.. नो .. मुझे भी कुछ लगा", रवि बोला।
"ज्यादा एकटिंग मत करो पकड़ी जाओगी", रवि ने औफ कैमरा श्वेता कि चुटकी ली।
"क्या करूँ यार टी.आर.पी. के लिये कुछ भी", श्वेता मुस्कुरा दी।
तभी वो भिखारी बाबा चिल्लाये, "बेटा मत जाओ, आज अमावस है बचोगे नहीं, हाथ जोड़ता हूँ मत जाओ।
"अरे कोई पागल है इग्नोर करो, इतनी जगह गये हम कुलधारा, भानगढ़ कुछ ना मिला, यहाँ क्या मिलेगा", श्वेता ने बोला।
उनकी गाड़ी बढ़ गयी।
"ये हाॅन्टेड हाईवे और मुंबई न्यूज़ कि टीम, हम आज आपको दिखाते हैं एन. एच. 13 का सच", रवि बोला।
तभी अचानक सामने एक बिल्ली आती है, गाड़ी काबू से बाहर हो जाती है और खटाक एक पेड़ से टकरा जाती है।
श्वेता और रवि निकलते हैं बाहर और रवि खीजता है, "ये क्या शुरुआत है यार आज का दिन ही खराब है, इधर तो कोई गाड़ी भी नहीं आती होगी कि लिफ्ट लेंगे।"
मतलब रात भर यही गुजारना होगा इस वीराने मे, ओह नो.. श्वेता बोलती है।
"फोन मिलाता हूँ , संजना को पता नहीं उसने खाया भी या नहीं", रवि बोलता है।
" शादी कि तैयारी कैसी चल रही है तुम्हारी, अगले महीने ही तो है", श्वेता ने पूछा।
"क्या शादी यार इन चैनल वालों ने ओवर टाईम करा-करा के वाॅट लगा दी है अपनी, बेचारी संजना को टाईम भी नहीं दे पाता हूँ...ओह नो फोन में नेटवर्क भी नहीं है", रवि बोला।
श्वेता के-2 मीटर निकालती है, वो जोर-जोर से हिलता है,!" ओह रवि मुझे तो डर लग रहा है", श्वेता बोली!
तभी सामने से एक बस आती है, आकर सीधा उनके सामने रूकती है और दरवाज़ा खुल जाता है।
" चलो कुछ तो दिखा, थैंक गौड", श्वेता बोली और दोनो उसपर चढ़ गये।
"आ... ई.. ई..... ई", पूरा जंगल दोनो के चीख से गूंज जाता है।
थोड़ी देर बाद वही श्मशान कि सी शांति जो थोड़े देर पहले थी, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
अगले दिन पुलिस, मिडिया और संजना सब वहां होते हैं!
"कार तो यहीं है पर वो दोनो कहां गये", संजना बोली।
सब ढूंढ लिया कहीं कुछ ना मिला।
" तुमने कुछ देखा है ओ भिखारी ", एक पुलिस वाले ने पुछा।
"साब... साब.. मैने मना किया था दोनों को मत जाओ नहीं माने, अमावस के दिन गये थे, ये तो होना ही था", भिखारी बाबा ने डरते हुये बाबा बोला।
पुलिस को कुछ तो जवाब देना था , सो उसने भिखारी बाबा को पकड़ के जेल मे डाल दिया।
इधर संजना को ये बात पची नहीं, वो उस भिखारी से मिलने जेल में गयी, सब कुछ पूछा।
फिर वो बोला, "सुनो इस बस का कंडक्टर सनकी और शराबी था, पर मेरा दोस्त भी था, पैसे के लालच में मुझे बोलता था कि रात में शराब पीने के बाद भी बस चलाने, मैं ना माना तो मेरे से बस चलाना सीख कर वो रात में यात्रियों को पहुंचाने लगा।
एक दिन ऐसे ही उसने अमावस के रात में बिना हेड लाईट के, पूरे यात्रियों से भरी बस तेज गति में चला रहा था एकाएक बस पेड़, से टकरायी, एक भी यात्री ना बचा और वो खुद भी मर गया।
तबसे रोज रात में कंडक्टर कि आत्मा बस लेकर इस रास्ते पर निकलती है और जो उसमें चढ़ गया उसकी आत्मा उसको मार देती है।"
संजना रोने लगी, भिखारी चुप कराता है और बोलता है, "पर अब इस मौत के सिलसिला को यहीं रोक दो बेटी, बहुत हो गया अब, तभी तुम्हारे मंगेतर और उन सब यात्रियों के आत्मा मुक्ति भी मिलेगी"।
" पर कैसै बाबा", संजना बोली।
"सुनो आज भी वो बस थाने बस डिपो में खड़ा है, उसका नम्बर है एम. एच. 56334, जा कर उस बस में आग लगा दो मेरी बच्ची और रोक दो ये मौत का खेल, क्योंकि वो रोज रात मेरे सपने में भी आकर तंग करता है, उसी के वजह से मेरी ऐसी हालत हुई है", भिखारी बोला।
संजना एक पुलिस वाले के साथ उस डिपो जाती है, वो खूनी बस वही खड़ी होती है।
संजना पुलिस वाले से पूरे बस पर पेट्रोल डालने बोलती है और खुद तब तक बस के अंदर जाती है, वहाँ रवि का मोबाइल मिलता है, जिसे देख कर वो रोने लगती है, तभी अचानक वो कंडक्टर संजना कि ओर दौड़ते हुये दिखाई देता है।
संजना डर जाती है, तभी सामने रवि की आत्मा कंडक्टर को पकड़े होती है और बोलती है "भाग जाओ संजना, मैं इसको ज्यादा देर नहीं रोक पाऊंगा।"
संजना दौड़ कर बाहर आकर बस में आग लगा देती है। बस में भयानक आकृतियां दिखायी देती है चीखती और चिल्लाती हुई।
अब एन. एच. 13 पर कोई भिखारी नहीं दिखता था और सारे यातायात समान्य हो गये!