भारतीय परंपराएँ

भारतीय परंपराएँ

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"मां, यह सब आयोजन किसलिए हो रहा है ?" रमन ने घर में पूजा आयोजन और रसोईघर से आती पकवानों की खुशबू सूंघते हुए पूछा।

"बेटा, आज तुम्हारे दादा जी का श्राद्ध है। पंडित जी को भोजन कराने से उनकी आत्मा को तृप्ति और शांति मिलेगी और वे हमें आशीर्वाद देंगे।"

" मां,क्या आपको सचमुच लगता है, यह जो हम पूर्वजों का श्राद्व करते हैं, वह उन्हें खुशी देता है ?"

" देखो बेटा,कल भी तुम इस विषय पर चर्चा या यूं कहें तो काफी लंबी बहस कर चुके हो। मैं एक बार फिर कहती हूं कि हमें अपनी सनातन परंपरा का सम्मान करना चाहिए।हमारे पुरखे भी यही करते आए हैं।

बेटा,अपने पूर्वजों का पूर्णतः विधी -विधान और श्रद्धापूर्वक और सामर्थ्यानुसार किया गया श्राद्धकर्म

 एक अलौकिक अनुभूति,एक अनोखा, अद्भुत संतोष देता है। जब हम उस संतोष को अनुभव करते हैं, तो हमारे पुरखे क्यों नहीं करते होंगे?"

"क्या आपको पूर्ण विश्वास है कि यह सब उनके आशीर्वाद का ही फल है ,कि हम सब सुखी हैं।"

 "हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार जो श्रद्धा से किया जाए वह श्राद्व है,और तुम्हें जानना चाहिए की श्राद्ध में

श्रृद्धापूर्वक तीन पिंडदान करने चाहिए,एक पूर्वजों का ,दूसरा ननिहाल पक्ष‌का और तीसरा ससुराल पक्ष का।"पिताजी जो कल से मां बेटे की इस चर्चा में शामिल नहीं हुए थे, आज उन्होंने रमन को समझाने की कोशिश करते हुए कहा।

 "ज्ञात - अज्ञात पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।,दादी भी कहां पीछे रहने वाली थीं,बेटा, यह हमारे ऋषि-मुनियों के काल से प्रारंभ हुआ कर्म है और हमें इससे आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है।"

"तुम्हारे जैसी नई पीढ़ी पूछती है,हम श्राद्ध क्यों करें,कौवे को खाना देने  से वह हमारे पूर्वजों तक कैसे पहुंचेगा ?तो तुम्हारी शंका के समाधान के लिए तुम्हें बताती हूं कि कौवे पर्यावरण बचाने में कितना

 काम आते हैं ।" रमन का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बैठाते हुए सोनी बुआ ने कहा ,

कहते है, कौवे भादों मास में अंडे देते हैं। इनके बच्चों को खाना आसानी से मिल जाए उसके लिए श्राद्ध में काग भोजन की प्रथा का प्रचलन हुआ, जिससे कौवों की प्रजाति में वृद्धि हो ,क्योंकि पीपल और बरगद कौवों की वजह से ही उगते हैं, है न विस्मय की बात ?"

"कैसी लग रीति,बुआ ?"

"प्रकृति ने इन उपयोगी वृक्षों को उगाने की अलग रीति बनाई है।इन दोनों वृक्षों के फलों को कौवे खाते हैं।जब यह बीज उनके शरीर में प्रवेश करते हैं, उनका कड़ा आवरण हटता है। वहां एक विशेष प्रक्रिया होती है।

इस प्रक्रिया के बाद कौवा जहां- जहां बीट करता है वहां पेड़ उगने की संभावना बनती है।"पिताजी क ओर देखते हुए बुआ ने कहना जारी रखा, और तुम तो विज्ञान पढ़ते हो और बखूबी जानते हो कि

पीपल बहुत ही महत्वपूर्ण पेड़ है।"

हां,बुआ यह २४ घंटे आक्सीजन छोड़ता है।इन वृक्षों के औषधीय गुण भी अनेक होते हैं।यह दमा,विष,घाव,नकसीर,तनाव के साथ त्वचा और दांतों के रोग में भी लाभकारी हैं।"

", इतना ही नहीं,बरगद अकाल के समय भी जीवित रहने वाला वृक्ष है। यह औषधीय गुणों की खान है।सूजाक,सिफलिस तक का इलाज इससे संभव है।"

 बड़े भैया जो अब तक सब की बातें सुन रहे थे उन्होंने कहा,"अगर हमें इन वृक्षों का संवर्धन करना है तो हमे कौवों को बचाना और बढ़ाना होगा। 

फिर श्राद्ध कर्म तो हमें हमारे निकटतम प्रिय जनों को प्रतिवर्ष याद करने का एक माध्यम है।हम अपने

पूर्वजों की स्मृतियों को ताजा करते हुए उनके न रहने

 के बाद उनके लिए श्रद्धा अर्पित करते हैं।उस निमित्त दान,पुण्य करते हैं।"

अब मां हंसते हुए बोली," चलो भाई,सुबह-सुबह बहुत हो गया। अब तो बेटा, तुम्हें अच्छी तरह समझ में आ गया होगा कि हम श्राद्ध क्यों करते हैं। उत्सुकता और तर्क बहुत अच्छी बात है किंतु अपनी पुरानी परंपराओं को गैर जरूरी मान लेना या मूर्खता समझना अच्छी बात नहीं है।"

"ठीक है, पर्यावरण की सुरक्षा की बात मेरी समझ में पूरी तरह आ गई है और फिर पकवानों पर भी तो हाथ साफ करना है।" हंसते हुए रमन रसोई घर में घुस गया।


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