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Akanksha Srivastava

Horror


4.2  

Akanksha Srivastava

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बाँसुरी का रहस्य

बाँसुरी का रहस्य

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आज काफी साल बाद में अपने गांव जा रही हूं। अपनी दादी से मिलने शायद 20 साल हो गए मुझे। बहुत छोटी सी थी तब का मुझे अपने गांव याद है वह पीपल के पेड़ पगडंडी झुरमुट ।लेकिन हॉस्टल जाने के बाद तो सब कुछ बदल गया होगा तो शायद पर न कुछ बदला ना होगा तो वह है मेरी दादी और उनका प्यार आज तो मैं आंगन में खटिया बिछा कर बहुत देर तक बातें करूंगी दादी से।

घर पहुंचते ही दादी ने मुझको सीने से चिपका लिया खूब सारा प्यार किया और खाते पीते हम लोगों को रात के 10:00 बज गए मेरी उत्सुकता तो हमेशा से ही भूत प्रेत जिन्न में रही है और मैंने दादी से फिर वही सब शुरू कर दिया पूछना 

"दादी यह भूत प्रेत क्या होते हैं कभी तुमने इनके बारे में जिक्र नहीं किया मुझे रातों में बहुत डर लगता है पर समझ में नहीं आता कि यह सच में होते भी हैं या नहीं होते हैं? तुम्हें तो पता होगा ना दादी की भूत प्रेत क्या होते हैं? जिन्न छलावे सब के बारे में दादी ने बहुत ही आसान शब्दों में कहा हां बेटा भूत प्रेत "जिन्न छलावे सब होते हैं साधारण सी बात है जिस चीज का कोई नाम होगा लोगों में उसके बारे में कोई संभावना होगी तो वो दुनिया में जरूर होगी।जैसे भगवान है तो शैतान भी होगा।"

" दुनिया में हर चीज हो सकती है जैसे तुम फिल्मों में देखती हो कि एलियंस होते हैं भूत दिखाए जाते हैं। यह सिर्फ एक कोरी कल्पना थोड़ी है और साथ ही साथ यह जो जिन्न परियां तुम्हें दिखाई जाते हैं ना मददगार, नेक ।ये हमेशा यह बिल्कुल ऐसे नहीं होते यह कभी-कभी बहुत खतरनाक होते हैं जिन्न और परियां सबसे ताकतवर योनि मानी जाती है और इन से पीछा छुड़ाना बहुत ही मुश्किल है पर छलावे खुद डरपोक किस्म के होते हैं लेकिन अगर सामने वाला डर जाए तो हावी हो जाते हैं और इन्हीं सब बातों से तो इनका अस्तित्व सामने आता है।"

"तो दादी आपने भी कभी देखा है क्या कहती है अच्छा दादी आप भी कभी अपना अनुभव बताइए आपने कभी देखा है ऐसा भूत प्रेत जिन्न परी कुछ तो जरूर देखा होगा "

 तब तक मां ने आवाज दी तुम दादी और पोती रात भर यही बातें करते रहोगी क्या चलो सो जाओ। डर जाओगी तो फिर कल का काम तो हो चुका।

 मुझे नींद नहीं आ रही थी मुझे दादी से बहुत कुछ जानना था क्योंकि दादी अब चुप बैठी थी वह कुछ बोल नहीं रही थी मैंने कहा दादी आपको यह बातें बतानी होगी लेकिन फिर कभी और इतना कहकर हम सो गए ।किसी तरह से रात बीती और मेरे दिमाग में उथल-पुथल चलती रही अगले दिन सारा काम करके शाम को मैंने फिर दादी को पकड़ लिया दादी कल की बात अधूरी रह गई थी चलिए हम चलते हैं छत पर।

 मैं दादी को लेकर छत पर पहुंच गई मैंने कहा दादी इस गांव में तो कुछ भी नहीं बदला यह देखो पीपल का पेड़ आज भी वैसे क्या वैसा है तो दादी ने कुछ नहीं कहा मैंने कहा आप कुछ बता रही थी आप बताइए तो दादी ने कहा "

मैं यह बात बहुत पुरानी है जो मैं तुम्हें बता रही हूं । यह बात मेरी शादी के समय की है। उस समय गर्मियों में ही शादियां ज्यादा हुआ करती थी और बारात तीन दिन तक रुका करती थी। शादी में बहुत सारे रीति रस्म भी हुआ करते थे जो अब शायद नहीं होते हैं।

 गर्मी की वजह से विदाई के समय डोली उठाने वाले कहार थक कर के मेरी डोली एक पेड़ के तने के पास लगा कर सुस्ताने लगे वह लोग पानी पीने के लिए कुछ दूर चले गए मैं डोली में अकेली बैठी थी कि अचानक से मुझे खुशबू सी महसूस हुई मैंने अपनी डोली का पर्दा खोल कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा और मैं एकदम नींद में सो गई उस गर्मी में मुझे ठंडक से महसूस हो रही थी।जब मैं ससुराल पहुँची तो शाम हो चुकी थी।अब तो मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा था।पर उस बांसुरी की आवाज मेरे कानों में गूंज रही थी और मैं मन ही मन सोच रही थी कि काश कि यह बांसुरी मुझे मिल जाती और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई जब आधी रात को मेरी आंख खुली तो मैंने अपने सिरहाने एक सुंदर सी बांसुरी देखी। पहले तो मैं डर गई कि यह बांसुरी कहां से आई फिर कौतुहल बस उठा लिया इतनी प्यारी बांसुरी अब मेरे हाथ मे थी मैंने बजानी चाही पर सुबह होने को थी। मैंने उसको अपने आंचल में छुपाया और अम्मा जी के कमरे में चली गयी सुबह का सारा काम कर ही रही थी कि नाश्ता बनाने की बात होने लगी तभी मेरे देवर और ननद आ गए और उन्होंने कहा भाभी भाभी आज आप गरम गरम जलेबी बनाओ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे दिमाग में तो बस में बांसुरी ही घूम रही थी मैंने देखा कि कोई नहीं है चौके में तो मैंने धीरे से वह बाँसुरी उठाई और बजाना शुरू कर दी है बांसुरी बजाने में इतनी खो गयी थी कि जब आंख खुली तो मैंने देखा कि खूब हरे दोनों में जलेबिया रखी हुई है। मैं वह जलेबी लेकर के बाहर जा रही थी कि सभी देवर ननद और बच्चों ने जलेबियां मेरे हाथ से ले ली और खाना शुरु कर दिया और मैंने भी किसी को सच नहीं बताया कि कि मुझे जलेबी बनाना नहीं आती थी पर यह जादुई बांसुरी का ही कमाल था कि मुझे समझ में आ गया था कि इसकी वजह से ही यह सब कुछ हो रहा है। फिर तो मेरा यह सबब बन गया था बच्चे मुझसे कुछ भी खाने की जिद करते और मैं बाँसुरी बजा करके वह सामान वहां पर रख दिया करती कभी पकौड़ी या कभी पुए कभी मठरी जब जिसका जो मन करता वह आकर मुझसे कहता और मैं अपना हाथ बढ़ा देती और मुझे सब सामान हाथ में मिल जाता बहुत दिन तक ऐसा ही चलता रहा और मुझे इसके बारे में किसी से बताने की जरूरत समझ में नहीं आई फिर मेरी नंद का ब्याह तय हुआ और उसके ब्याह की तैयारी में मुझे बहुत सारा काम था विवाह की तैयारी में हमारे घर में सारे जेवर संदूक में रख दिए गए थे तब हमारा घर मिट्टी का होता था तो उस मिट्टी की दीवार में सेंध काटकर चोर चोरी करने के लिए आए ।उन्होंने बहुत बड़े संदूक को खींचने की कोशिश की। एक तरफ से वह चार चोर उस संदूक को खींच रहे थे और दूसरी और मैं अकेली थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई इस खींचातानी में भोर हो गई और मैं उस संदूक पर बेहोश होकर के गिर गई ।

घर वालों ने देखा कि संदूक आधे दीवार के बीच में है और उधर बाहर से चोर पकड़े गए ।चोरों ने तो सीधे मेरा नाम ले लिया कि "यही औरत थी जो रात भर संदूक को खींचती रही और हम संदूक को खींच नहीं पाए और उसने हमें चोरी नहीं करने दी हमें माफ करिए हमने आपका एक तिनका भी नहीं चुराया हमें जाने दीजिए"

घर मैं शादी का माहौल था तो लोगों ने उन चोरों को जाने दिया अब पूरा घर मेरे सामने इकट्ठा था सब मुझसे पूछ रहे थे कि तुम्हारे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई और मैं कुछ बताने के लिए होश में ही नहीं थी।बस मुसकुरा रही थी। घरवालों को समझते देर न लगी कि मेरे ऊपर किसी चीज का साया है उन्होंने आनन-फानन में तुरंत तांत्रिक को बुलाया और मुझे दिखाने लगे तांत्रिक आते ही दरवाजे के अंदर ही नहीं आ रहा था उसने बाहर से ही बता दिया कि इनके ऊपर जिन्न का कब्जा है और यह बात सुनते ही मेरा चेहरा एकदम तमतमा गया मैं सब सामान उठा उठाकर फेंकने लगी मेरे बगल में जो बच्चे खेल रहे थे मैंने उनको एक को हवा में उठा दिया और मैं उन्हें पटकने वाली थी कि मेरी सासू मां ने मेरे सामने हाथ जोड़े तब तक मेरी आवाज बदल गयी और मैं चिल्लाते हुए बोली कि कोई तांत्रिक घर में नहीं आएगा और मैं रूपा को कभी परेशान नहीं करूंगा लेकिन घर वाले कहां मानने वाले थे।वो लोग मुझे बांध कर के बाहर ले गए। वहां जिन्न ने कबूला की वो मेरे ऊपर अपना प्रभाव जमा चुका था।और मुझे छोड़ेगा नही।जब मेरी डोली पीपल के पेड़ के नीचे रखी गई थी उस समय ही वो मुझ पर हावी हो चुका था।तांत्रिक में पूरी कोशिश की उस तांत्रिक के बस की बात नही थी।

तब तक उस जिन्न ने मुझ पर ही वार शुरू कर दिया मैं अधमरी सी हो गयी थी और बोलती थी कि वो मुझे साथ ले जाएगा।हर समय साये दिखते।डरावने चेहरे डरावनी आवाज हर समय महसूस होती।असमान्य गतिविधिया सबको महसूस होती जैसे बिना आग के चूल्हे का दूध खौलता रहे। सारी पूजा निष्फल हुई जा रही थी।मुझे कमरे में बंद कर के ननद की शादी की गईं। अगले दिन मेरे पति यानी तेरे दादा जी मेरे पास आये मुझे बेहोशी की हालत में देख के रोने लगे तभी जिन्न ने कहा इसे सही सलामत देखना चाहते हो तो इसके पास भी मत आना उन्होंने जिन्न से कहा रूपा को कष्ट मत दो।और तभी उन्होंने मेरी कमरे के एक कोने में बाँसुरी देखी।उस बाँसुरी को देख वो चौके और उसे उठा कर बाहर चले गए तांत्रिक ने फिर पूजा की अबकी पूजा का असर हुआ। तांत्रिक ने मेरे पति से पुछा की कुछ मिला है क्या ।उन्होंने बाँसुरी दिखाई।बाँसुरी को देख तांत्रिक सकते में आ गया।उसने कहा ये प्रेतबधित बाँसुरी है।और इसी बाँसुरी के कारण ये जिन्न असाधारण है।उसने अपने गुरु को बुलाया।उनके गुरु ने मेरे सिर पर पानी डाला फिर मैं बैठ के पानी से ही कुछ लिखने लगी।जिन्न ने अपनी कहानी लिखी वो एक बाँसुरी वादक था उसकी हत्या की गई थी।उसकी जान प्राण सब बाँसुरी ही थी फिर अचानक से गुरु ने बाँसुरी बजा कर उस जिन्न को मेरे शरीर से बाहर निकाला।और उसके बाद बाँसुरी तोड़ दी।उसके निकलने के बाद भी मैं दो दिन तक बेहोश रही।


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