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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

अंतरिक्ष

अंतरिक्ष

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एक समय विस्फोट हुआ अंतरिक्ष में

तारे टूटे ग्रह उपग्रह नक्षत्र बने 

ऊर्जा का असीमित संचार हुआ 

सृष्टि का निर्माण हुआ 


जन्मे पृथ्वी और चंद्रमा 

सालो साल लगे धरा पर जीवन जन्मा 

जीव-जंतु और सब मे उत्तकृष्ट मनुष्य जनमा

जन्मे पेड़ पौधे और ये नीला आकाश 


जीवन चला वर्षो तक जीवन का विस्तार हुआ 

सृष्टि का निर्माण हुआ

पहाडो का सीना चीर नदिया जन्मी 

और नदियों से जन्मी सभ्यताए


सबने गढ़ा नए ईश्वर को 

अलग अलग धर्म जन्मा जाति जन्मी

सभ्यताओं में विकार हुआ

आधुनिकता के साथ युद्ध जन्मा 


सभ्यताओ का संघर्ष जन्मा 

धीरे धीरे सभ्यताओं के विनाश हुआ।

मानवता वरदान थी सृष्टि की,

मानवता अभिशाप ही हुआ।।


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