अनकहे रिश्ते
अनकहे रिश्ते
मुँह क्यूँ उतरा है आज तुम्हारा!" कॉलेज की कैन्टीन में रूपाली को उदास बैठे देखा तो झट पूछ लिया मुकेश ने।
"कुछ नहीं !"
"फिर लड़ाई हो गई क्या सोमेश से!"
"हाँ !"
"तुम दोनों को कोई काम नहीं लड़ने के अलावा!" "......!"
"चलो मैं तुम दोनों की सुलह करवाता हूँ ।"
मुकेश ने धीरे से रूपाली का हाथ थामा और बिना कुछ खाए ही कैन्टीन से निकल गया।
रूबी दूर बैठी सब तमाशा देख रही थी। रह रह कर उसे मुकेश की बात याद आती -
"बहुत प्यार करता हूँ रूपाली को! किसी भी हाल में उसे दुखी नहीं देख सकता!"
रूबी ने मुकेश के लिये कुछ खाने को लिया और उसके पीछे चल दी।

