अनदेखा अनसुना..
अनदेखा अनसुना..
आज उन्होंने पूछा, तुम्हें मुझसे देखने के बाद प्यार हुआ या बिना देखे.. मतलब मेरे शरीर से प्यार है या शक्ल से..
कभी कभी न सारी प्रोफेसरी हम पर ही निकालते है जनाब..
बेड पर लेटे लेटे रोज की तरह सोचा दुआ सलाम कर लिया जाए..
उनसे बात न हो तो हमारी तो सुबह ही नहीं होती.. तो बस यही सोचकर बातें शुरू हुई.. थोड़ा रोमांस भी, ये भी हम ही शुरू करते हैं तब जाकर उधर चाबी लगी..
एक इमोजी भेजी उन्होंने किस करती हुई..
बस हम ने सवाल दाग दिया कि ये बन्दा कौन है???
दन से ज़वाब आया, वही है जिसे तुम प्यार करती हो..
ना जी ना, ये तो वो नहीं हैं...हम ने इनसे प्यार नहीं किया है..
प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है..
प्यार तो हमें हुआ था, उन्हें तो करवाया था हम ने..
अच्छा, मतलब तुमने शक्ल देखकर प्यार किया???
बिल्कुल नहीं... मन में जब कुछ एहसास जागा तब शक्ल ध्यान से देखे, पर तब तक तो दिल के मन्दिर में आप विराजमान हो चुके थे,
तो अभी जिसे भेजा था, वो वही था, जो आपके दिल में है..
हम समझ गए कि इनसे जीतना हमारे बस की बात नहीं.. हम कुछ और बातें करते इस से पहले ही उन्होंने इजाजत मांग ली की उन्हें तैयार होना है, कॉलेज के लिए..
जहां तक प्यार मोहब्बत की बात है, देखकर या बिना देखे प्यार होता है क्या,
पहले भी और आज भी अरेंज मैरिज होती है.. और कैसे दो लोगों में प्यार का अटूट रिश्ता बन जाता है..
और इस अटूट रिश्ते का प्यार पनपता है और फिर एक अनदेखा और अनसुना सा रिश्ता जन्म लेता है..
दो अनदेखे लोग दो अनदेखे रिश्ते कैसे जन्मों जन्म एक दूसरे से जुड़ जाते हैं..
पर फिर भी वो एक दूसरे को देख लेते हैं..
फ़िल्मों में देखा है, कहानियाँ भी पढ़ीं की बिना देखे एक दूसरे से प्यार हो जाता है, पर जब दोनों एक दूसरे से मिलते हैं तो दोनों में कहीं कोई कमी नहीं होती..
पर सोचें कि... यदि ऐसा हुआ, मतलब दोनों में से किसी में कोई ऐसी कमी मिली, जो जन्मजात हो.. फिर चाहे वो किसी भी प्रकार की हो, तो क्या प्यार कायम रहेगा..
यदि रहा तो??????
हमारी कहानी भी कुछ ऐसी ही है.. कुछ इसलिए कि इसमें पूर्णता नहीं है, बस चलते ही रहना है,
हमें उन्हें पढ़कर उनसे प्यार हुआ.. फिर उनकी पिक्चर देखी.. पर तब तक वो दिल में समा चुके थे..
उन्हें भी हम से कुछ लगाव सा हुआ.. धीरे धीरे वो प्यार में तबदील हुआ, उन्हें हमारी तस्वीर से ज्यादा हमारे होने पर शक था कि हम कोई बहुरूपिया तो नहीं,
इसलिए फिर अपनी पिक्चर भेजनी पड़ी.. पर ये सच है कि उन्हें हमारे एहसास से प्यार हुआ, हमारी शक्ल से नहीं.. और गर्व है हमें की वो हमारी जिंदगी में हैं..
हमारी प्यार की कहानी में शक्ल सुरत की जगह नहीं रही.. बिना शर्तों का बंधन बँधा हुआ है.. कुछ भी नहीं चाहिए एक दूसरे से, बस साथ होने का एहसास, बिना मिले बिना देखे,
कोई शर्त नहीं, कोई मांग नहीं, बस प्यार,
अनदेखा, अनसुना और अनछुआ,
हमारा प्यार...

