Swati Rani

Thriller Horror


4.6  

Swati Rani

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आखिर कौन है वेयरवुल्फ??

आखिर कौन है वेयरवुल्फ??

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"अरे ओ सुनील जा",जल्दी से मार्केट से दौड़ के रसगुल्ले ले आ, ताजे ले आना और हा नमकीन का पैकेट भी ले आना ज्योति स्टोर्स से,वहां के नमकीन जमाई बाबु को पसंद है, जा जल्दी दौड़ के", रूपा की माँ बोली! 


सुनील उनके यहाँ का नौकर था! 


"अरे जमाई बाबु कैसे आना हुआ खबर तो कर देते, कुछ तैयारी कर लेते हमलोग", रुपा की माँ बोली !


रमेश ने झुक के सास के पैर छुये! 


जब से रूपा मायके आयी थी, रमेश दो बार ससुराल आ चुका था! उधर जमाई यानी रमेश की कातर निगाहें ढूंढ रही थीं, किसी एक को! 

"जमाई बाबू खाइये ना" थोड़ी देर में फल, मिठाईयाँ, नमकीन सब टेबल की शोभा बढ़ा रहे थे !पर रमेश का मन कहा था इन सब में! 

"किसे ढूंढ रहे हो जमाई बाबु", सास ने चुटकी ली! 

रमेश शरमा गया! 

"रुपा,अरे ओ रुपा.. देख तो कौन आया है"! रूपा की माँ चिल्लाई! 

रुपा ने सब सुन लिया था, ये वाली साड़ी रमेश ने मुझे शादी के बाद गिफ्ट दी थी ये पहनुंगी ! 

"आई माँ",रूपा चिल्लाई! 

रुपा आई और रमेश के पैर छुए!रमेश ने देखा तो देखता रह गया अपलक! 

रूपा ठीक वैसी ही लग रही थी, जैसे पूनम का चांद, आखिर हो भी क्यों ना भरा-पूरा, गोरा छरहरा बदन था,लम्बी चौड़ी थी! नागिन से लम्बे काले बाल जो कमर तक थे! मनमोहक हंसी! कातिल अदाऐं, हिरनी जैसी आंखे इन्हीं पर तो फिदा था वो, दिलों जान से! 

***********

थोड़ी देर बाद रुपा और रमेश एक दूसरे के आगोश में थे! "कहो कैसे आना हुआ, इंस्पेक्टर बाबु", रूपा ठिठियाई!

" बीबी से मिलने के लिए परमिशन चाहिए क्या"? रमेश बोला! 

"सच रूपा तुम मेरे घर शादी के बाद बीस-पच्चीस दिन ही रही, पर क्या जादु किया है मुझपे, पैर खींचे से चले आते है तुम्हारी ओर, सब कुछ वीराना लगता है तुम्हारे बिना, ऐसा लगता है सब कुछ छोड़ घर जमाई बन जाऊं,बस फोन पर ही नजर रहती है, वहां तो ", रमेश बोला! 

रूपा मुस्काई! 

"एक बात बतानी है तुम्हें, रूपा ने नजरें झुका के और शरमा के कहा ,"मैं तुम्हारें बच्चे की माँ बनने वाली हुं"! 

रमेश तो मानो उसकी लौटरी लग गयी, उसने रूपा को माथे पर चुम लिया, " पूछा कब हुआ ये"? 

रूपा बोली,"पिछले बार जब तुम आये थे"! 

रमेश बोला "चलो आज मूवी जाते हैं ,पार्टी करेंगे"! 

ठीक शाम में 5 बजे तैयार हो जाना और हां वो ब्लू वाली साड़ी पहनना और ब्लु इयररिंग! 

दोनो आटो में बैठ के आने लगे " मूवी अच्छी थी ना"? रमेश बोला! 

"हां मुझे तो बढिया लगी,अंत बहुत बढ़िया थी, मैने सोचा नहीं था, हिरोइन मर जाएगी", रूपा बोली! 

रमेश बोला, "हां मैं तो रो पड़ा था! 

रुपा हंस पड़ी! 

रमेश बोला, "तुम मुझे छोड़ कर मत जाना कभी भी"! 

रुपा ने हाथ पकड़ कर कहा,"कभी नहीं"!

तभी रमेश को एक काम याद आया ! 

वो बोला, "मैं आता हूँ अभी, तुम घर जाओ मुझे कुछ काम है "!

सिगरेट मत पीना और जल्दी आना", रूपा ने आंखें दिखायी!

रमेश ने आटो वाले को पैसे दे दिये! 

अभी रमेश घर वापस आ ही रहा था की सामने उसकी नजर एक लाश पर गयी, वहां बहुत भीड़ थी लोग बातें कर रहे थे !आगे जा कर देखा तो आंखे फटी रह गयी! एक युवक की लाश पड़ी थी, काफी डरावना दृश्य था, उसका पेट ऐसे खुला था जैसे बैग का जीप, सारी अंतड़िया ऐसे निकली हुई थी ,मानो जैसे कीसी चादर का धागा धागा खोल दिया हो, चारों तरफ खून ही खून बिखरा था! पूनम के चांद के रोशनी में सब साफ- साफ दिख रहा था, काफी वीभत्स दृश्य था! एक आदमी तो रमेश के बगल में खड़ा उल्टियां कर रहा था ये देख कर!सब दबे मुंह बात कर रहे थे की बगल वाले जंगल से कोई जानवर आया होगा, कोई बोल रहा था कीसी गिरोह का काम है, जितने मुंह उतनी बातें! तभी मौके पर पुलिस पहुंची, उसी में से एक पुलिस ने रमेश को पहचाना!

"अरे सर आप यहां",सब इंस्पेक्टर राज ने कहा!

"हां ससुराल आया था," रमेश ने कहा !

रमेश को लौटने मे रात हो गयी! रूपा ने गेट खोला इससे पहले वो बरसती,रमेश ने झट हाथ आगे किया, "बोला आज का दिन काफी खास है",उसमें रुपा के लिए एक सोने के इयररिंग थे!

 वो खुशी से रमेश से लिपट गयी,"चलो जल्दी फ्रेश हो के खाना खा लो"! 

रमेश ने थोड़ा ही खाया,"अरे तुमने तो कुछ खाया ही नहीं"!

"दरअसल मेरे बैच का एक दोस्त मिल गया था, उसने थाने में बहुत कुछ खिला दिया था", रमेश बोला! 

रूपा माथे पर हाथ रख कर बोली," हाय मेरे करम,अब यहां भी थाना, ये कब मेरा पीछा छोड़ेगा?? 

रमेश हंसकर बोला, "इसिलिए तो लड़कीया पुलिस वालों से शादी करने से कतराती हैं, क्योंकी पुलिस वालों की पहली मोहब्बत पुलिस चौकी ही होती है"!

************

रमेश ने राज से कहा, "अभी वो 4-5 दिन छुट्टी पर है, पर वो ससुराल मे सारा दिन बोर हो रहा है, तो वो पुलिस चौकी आ जाया करेगा"! अगले 5-6 दिन तक पुलिस की गस्ती तेज थी शहर में, कहीं कुछ ना हुआ! 

तभी कांस्टेबल पकड़ कर लाया एक आदमी को,"उसने बोला हुज़ूर मैंने देखा था एक जंगली जानवर की परछाई जंगल की ओर जाते हुये"!

"अच्छा रामसिंह इसका नाम पता लिख कर छोड़ दो इसको",सब इंस्पेक्टर राज ने कहा! 

सब- इंस्पेक्टर राज ने जानवर का हवाला देकर केस बंद कर दिया 

और सरकार को जंगल में बाड़ लगवाने की दरख्वास्त दी! 

**********


रूपा के मां पापा ने रमेश से गुजारिश की की जमाई बाबु आप यहीं तबादला ले लिजीए ना ,क्योंकी रूपा हमारी एक ही संतान है, आपको भी बार- बार आना पड़ रहा है और अब तो रूपा के पेट में बच्चा भी है,कौन ख्याल रखेगा उसका वहाँ" ?

रूपा से पहले रमेश की मकानमालकीन उसको खाना देती थी,शादी से कुछ दिन पहले ही उसके माँ- पापा की एक्सिडेंट में मौत हो गयी थी!रूपा के लिये तो वो जान भी दे सकता था!उसने सोचा क्यों ना यही तबादला ले लुं, कीराये के रुम मे यहां भी रह लेंगे , रूपा के मां-पापा ,रूपा और मेरे बच्चे का ख्याल भी रख पाएंगे और इनकी बात भी सही है,मैं तो अकेला हुं , ज्यादातर ड्युटी पर रहता हूँ, ऐसे मे कौन ख्याल रखेगा उसका! 

चुकीं रमेश काफी अच्छे ओहदे पर था, और इस पुलिस चौकी पर कोई आना नही चाहता था, तो ये काम आसान भी था! 

रमेश और रूपा यहीं शिफ्ट हो गये! 

कुछ दिन में रमेश गया और सारा सामान ले आया! वो दोनो ससुराल से थोड़ी दूर किराए के घर पर रहने लगे! 

*********

एक दिन जब रमेश थाने में गया तो वैसे ही हालत मे उसको एक और लाश मिली!

 पर इस बार लाश के साथ कुछ सबुत भी मिले थे,कातिल के पदचाप जो उन्होने फारेंसिक मे दे दिया गया! पता चला ये भेड़ियो के पैर के निशान थे!

"पर ये तो दो ही हैं, बाकी के दो कहां गये"?? रमेश ने पूछा! 

रामसिंह बोला, "सर कहीं ये आदम भेड़िया तो नहीं"?? 

"ये क्या होता है"??रमेश बोला!  

"सर मेरी माँ यहीं की थीं और बताया करती थी, कुछ वक्त पहले इस शहर के जंगल में भेड़ियो का बहुत आतंक था! बहुत भेड़ गायब होते थे पूनम की रात में,उनहीं में से कोई बन गया होगा आदम भेड़िया जो आदमियों को खाता होगा और आधा जानवर,आधा आदमी होगा"! 

"क्या आज के जमाने मे होते हैं ये"?? रमेश थोड़ा सोचते हुये खुद में बुदबुदाया !

**********

"अरे तुम अभी तक सो रही हो", रमेश बोला! 

"क्या करूं कमजोरी आ गयी है, इस केस के चक्कर में तो तुम मुझे भूल ही गये हो", रूपा बोली! 

"ऐसा नही है पर तुमहें तो पता ही है मेरा स्वभाव ,मै कीसी चीज की तह मे जाना पसंद करता हुं"! रमेश बोला! 

रूपा बोली,"आग लगे इस नौकरी को"! 

रमेश मुस्कुरा दिया! 

*************

फिर एक और कत्ल हुआ, 

सारे कत्ल में एक ही चीज समान थी, वो थी पदचाप , लाश की स्थिती और वो हर पूनम की रात कत्ल होना! सब -इंस्पेक्टर राज बोला, "सर अब तो ये लग रहा है जिसने भी ये मिस्टरी साल्व की उसकी मेडल पक्की"! 

************

अगले दिन से सब शहर मे पोस्टर लग गये थे, हर पूनम की रात आप सब लोग 6 बजे के बाद घर से ना निकले! रमेश, राज, रामसिंह और हरिसिंह गस्त लगा रहे थे शहर की ! फिर एक कत्ल हुआ! 

"आप लोग निकले क्यों घर से"??रमेश थाने में चिल्लाया! 

"सर मैं कीचन में थी, अचानक दरवाजे पर कीसी औरत की आवाज आयी, मुझे बचा लो,मुझे बचा लो, संजीव ने मुझे बेडरूम मे बंद कर दरवाजा खोला, फिर संजीव की चीख सुनाई दी मुझे", मृतक की बीबी बोली! 

तब रमेश सोचने लगा, मतलब रामसिंह सही बोल रहा था, ये कोई आदमभेडि़या है"!

"नहीं नहीं ये सब बकवास है", रमेश खुद से बड़बड़ाया! 

******

रमेश का एक दोस्त उसके लिए भेडि़यो की खाल वाला बेल्ट लाया था,जैसे रूपा ने उसे देखा आगबबूला हो गयी," फेकों इसे मुझे नहीं पसंद कोई जानवर को मारे"! 

"अच्छा ठीक है फेंक देता हूँ",पर वो काफी महंगा था तो रमेश ने उसे छुपा दिया! 

********

एक रात पार्टी पर रमेश निकला ही था की वो बेल्ट भूल गया लौट कर आया तो, छुप कर दबे पांव से रूम मे गया की रूपा बेल्ट देख ना ले! देखा रूपा का दरवाजा बंद था, बेल्ट लेकर उसने उस रूम के डोरलौक से देखा,पर सामने जो देखा उसकी रूह कांप गयी, पैरो तले जमीन खिसक गयी! 

रूपा अपने कपडे़ निकाल के फेंक रही थी, दर्द से कराह रही थी, उसके शरीर पर बडे़ बडे़ रोयें निकल रहे थे,वो गुर्रा रही थी,छटपटा रही थी, बेचैनी में थी, उसके पंजे फुल रहें थे,नाखून बढ़ रहें थे, बगल की दांते बढ रही थी,नुकीली हो रहीं थी, देखते देखते वो आदमखोर भेडि़ये मे बदल गयी! रमेश छुप गया और वो निकल गयी शिकार को! 

रमेश का कलेजा मुंह तक आ गया,जिसको उसने सबसे ज्यादा प्यार किया उसकी ये हालत ,आं सू नहीं रूक रहे थे उसके और हो भी क्यों ना, मां बाप भी तो नहीं थे उसके! 

रमेश ने पीछा कीया वो जंगल में गयी एक गुफा में, रमेश ने गुफा की छेद से देखा, वहां बहुत से भेडि़ये थे, सब हुंकार रहे थे,ऊपर की ओर मुंह कर के गुफे के टूटे छत से चांद को देख के ,सामने उंचे पर एक आदमी जैसा भेड़िया था, एकदम डील डौल वाला, राजाओं जैसे तेवर थे,खूंखार शरीर पर घने लम्बे बाल, बड़ी बड़ी पैनी दांते! 

"आओ, भेडि़यो के समाज में तुम्हारा स्वागत है"! 

"पुष्पा बोली, "मैं हरदम के लिये यहीं रहना चाहती हूँ ,लेकन" ! बस ये बच्चा हो जाये फिर तुमको रुप बदलने का इंतजार नहीं करना होगा,तुम जब चाहोगी आदमभेडि़या बन पाओगी, पूनम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, पहले से अधिक मांसल और ताकतवर भी हो जाओगी तुम,कोई चांदी का अस्त्र तुमको मार नहीं पायेगा और हम दोनों शादी कर लेंगे", लाईकन बोला! सब भेडि़ये और पुष्पा हुंकारने लगे चांद की तरफ सिर उठा कर ! 

********


रमेश अगले दिन रूपा के मां पापा से मिलने गया!पहले तो वो कतराए, पर फिर रूपा के पापा रोने लगे और बोले, "शादी के 15 साल के बाद रूपा हुई,बचपन से अजीब सी  बीमारी थी इसको, डाक्टरों का कहना था इसका रहना खतरनाक है, पर मैं ममता मे अंधा हो गया था, मैने इसको पाला,बचपन में एक बार पूनम के दिन इसने पडो़सी के बकरी को मार दिया और एक बार हमारी मुर्गी को,उसके बाद वो जंगल चली जाती थी, भेड़ो को मारती थी, फिर आदमियों का शिकार करने लगी !मैं इसको एक तांत्रिक के पास ले गया उन्होने कहा ,इसको मार दो!

मैने कहा, "मेरी एक ही औलाद है"!

उन्होने कहा था ममता मे अंधा मत हो !

मेरे बहुत बार कहने पर उन्होने इसको कंगन दिया जिसमें चांदी था, वो बोले की भेडि़या चांदी से डरते हैं,जब तक ये कंगन इसके हाथ में रहेगा, ये भेड़िया नहीं बनेगी! 

"अभी तक सब कुछ ठीक था बच्चा रहने के बाद ये मोटी हो गयी तो कंगन उतार दिये और पेट में जो बच्चा है, तो कमजोरी से वो शिकार कर रही है, पर इस बच्चे के खून से वो फिर से इंसान बन जायेगी" रूपा के पापा बोले! "पापा प्लीज अगर बच्चा भी आदमभेडि़या बन गया तो??मैं अपने स्वार्थ के लिये लाखों लोगों की जान खतरे मे नहीं डाल सकता", रमेश बोला! 

रमेश रूपा के पापा के साथ उस तांत्रिक के पास गया,तांत्रिक ने पहचान लिया, "बोला मना किया था ना, हो गया ना शुरू मौत का मंजर, अगर उसका बच्चा हुआ तो वो और खतरनाक आदमखोर होगा! रुपा के पापा हाथ जोड़ कर बोले, "हमे बचा लो गुरु जी"! 

तांत्रिक उन्हे चांदी का अस्त्र देता है और बोलता है इससे उसके सिर के बीचों बीच मारना, जब वो भेडिये में बदल रही होगी, उसको मुक्ति मिल जायेगी"! 

रमेश टूट चूका था ,जैसे एकपल में उसकी दुनिया ही बरबाद हो गयी थी! भरे मन से वो रूपा के पापा के साथ घर आया! वहां रूपा पहले से बैठी थी,उनको देखते गरजी, "आ गये दोनों मेरे और मेरे बच्चे के खिलाफ षड्यंत्र रच के"! 

रमेश आगे बढा, तभी रूपा ने फलों वाली चाकू उठा ली और चीखीं, अजीब वहशीपना था उसमें, आंखें कुटिलता से चमक रहीं थी!"

"मैने तुमको पापा से फोन पर बात करते सुन लिया था, मैं ठीक हो रही थी तुम्हारे प्यार से, उस तांत्रिक ने बोला था, अगर लागातार 9 साल तक मैं खून नही पीती तो मैं मानव बन जाती, पर ये बच्चा रहने पर मुझे खून की तलब लगने लगी कमजोरी से, एक बार मेरे बच्चे को आ जाने दो फिर हमदोनों मां बेटा तुम लोग के जिंदगी से दूर चले जाएंगे! 

अजय के आंखो में आंसू थे! अचानक पुष्पा आदम भेडि़ये में बदलने लगी, उसका खुद पर वश ना था ! 

तभी पुष्पा के पापा चिल्लाए, "जो गलती मैने की तुम मत करो, ये अच्छा मौका है, पुष्पा आधी जानवर है आधी इंसान,मार दो इसे, इसकी बातों में मत आओ रमेश"! पुष्पा पापा पर झपटती है और नोंच देती है उनको अपने तीखे पैने नाखूनों से, उनकी अंतडि़या निकालने ही जाती है, की रमेश उसके सिर मे चांदी का तीर घोप देता है! 

पुष्पा कातर निगाहों से रमेश को देखते हुए दम तोड़ देती है! रमेश को समझ नहीं आ रहा था खुश हो या दुखी,एक तरफ उसकी जिंदगी खत्म हो गयी थी, दूसरे तरफ शहर को आदमखोर भेड़ियों से मुक्ति मिल गयी थी! 

उसको पुष्पा से कही बात याद आ रही थी की पुलिस वाले की पहली मोहब्बत पुलिस चौकी ही होती है! 

तभी रमेश के पापा ने कहा, "मैं ही सारे फसाद की जड़ हूं ,मेरे वजह से कीतनी जानें गयीं ,अब मुझे इस दुनिया मे रहने का कोई हक नहीं है, वैसे भी इसने मुझे नोंच लिया है,मैं भी आदमभेडि़या बन जाऊंगा "और उन्होनें खुद को चाकू भोंक लिया! 

तभी रूपा की माँ भेड़ियों जैसी दांतो से मुस्कराती है !.....


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