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Man Singh Negi

Classics

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Man Singh Negi

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अफसोस लोग गुलामी रूपी नौकरी करने को तैयार हैं परंतु.......

 पुष्पा ने कहा किस बात का अफसोस कर रहे हो। 

राजेश्वरी ने कहा ये किसी ना किसी विषय को लेकर अपनी टेंशन बड़ा कर गमगीन या अफसोस करते रहते हैं।

पूजा ने कहा ऐसी बात नहीं है। वक्त बदलता रहता है। 

हर समय घड़ी की सुइयां टिक टिक करके संदेश देती है। 

मैं किसी के लिए नहीं रुकूंगा इतिहास गवाह है।

मैं समय हूं मैंने जीवन के हर पड़ाव देखे एवं अनुभव किए हैं।

कभी कोई जीत का जशन मनाता है। कभी कोई हार का दुख मनाता है। कभी कोई तनाव में आकर अफसोस करता है। 

मैंने बड़े-बड़े धुरंधर देखे हैं। मैंने बड़े-बड़े शूरवीर देखे हैं। मैंने बड़े-बड़े दानी देखे हैं। मैंने बड़े-बड़े सहयोग करने वाले देखे हैं।

परंतु यह भी सत्य है यह सत्य ही नहीं अपितु 16 आने सच है। 

भारतीय मानसिकता चाहती है आप तरक्की करें।

परंतु वह यह कभी नहीं चाहती आप उनसे ज्यादा तरक्की करें। 

आप जब तक सहयोगियों के बराबर चलते हैं। 

उन्हें आपके व्यवहार से आपकी योजनाओं से कोई दिक्कत नहीं होती। 

लेकिन जैसे ही आपके व्यवहार में बदलाव आता है। 

वह तुरंत ही आपके उस बदलते हुए व्यवहार पर आपत्ति दर्ज करते हैं। 

वह ना खुद को मानसिक रूप से बदलने को तैयार होते हैं। ना ही वह चाहते हैं। 

उनके साथ रहने वाला कार्य करने वाला उनके साथ छोड़कर गरीबपुर से अमीरपुर की तरफ चल पड़े।

जो पूजा के माध्यम से समय की आवाज सुन रहे थे। 

वे एक दूसरे को देखकर सिर हिलाते हुए स्वीकार कर रहे थे। 

जो कुछ पूजा समय के माध्यम से बताना चाह रही है। वह अटल सत्य है।

पुष्पा ने कहा मेरे पति मान नौकरी के साथ-साथ अपना व्यापार कर रहे हैं।

वह स्वयं चाहते हैं आने वाले पीडिया के लिए वह एक ऐसा व्यापार खड़ा कर दें।

जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में मिले व्यापार में चार चांद लगा सकें। 

विरासत मे मेिले व्यापार से उनका जीवम बेहतर हो सके। 

राजेश्वरी ने पूछा आपके पति नौकरी के साथ कौन सा व्यापार करते हैं। 

पुष्पा ने कहा उन्होंने vestige कंपनी के माध्यम से पार्ट टाइम व्यापार की शुरुआत की है।

परंतु वास्तव में व्यापार को अभी सही दिशा नहीं मिली है।

आए दिन कई ग्राहक बनते और बिगड़ते रहते हैं। 

आए दिन कई ग्राहक जुड़ते और छुटते रहते हैं।

परंतु मेरे पति बता रहे थे। आप जिन्हें अपना कहते हैं। 

चाहे वह पड़ोस हो रिश्तेदार हो या दफ्तर में काम करने वाले सहयोगी हो। 

ये बाजार से सामान तो खरीद सकते हैं। 

परंतु कभी भी ये अपने परिचित से सामान नहीं खरीदेंगे। 

राजेश्वरी ने कहा ऐसा कड़वा अनुभव तुम्हे क्यों है।

पुष्पा ने कहा क्योंकि वह अपना व्यापार खड़ा करना चाहते हैं। 

जब भी कोई एक साथ रहने वाला अपनी अलग राह चुनता है। 

तो उसके जीवन में अनेकों कठनाईया आनी शुरू हो जाती हैं।

शायद मेरे पति के साथ भी एक नया बिजनेस खड़ा करने के लिए शुरुआती दौर पर इतनी परेशानियां आ रही है। 

हालांकि अभी हमें इस व्यापार को करते हुए 8 महीने से अधिक हो गए हैं।

लेकिन ग्राहक हमसे अभी ज्यादा नहीं जुड़ पाए हैं।

जिसके कारण व्यापार मे अभी धीरज बनाए रखने की आवश्यकता है।

पुष्पा ने कहा सहज़ पके सो मीठा होय। 

 पुष्पा ने कहा मैं जानती हूं कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। 

पुष्पा ने कहा जीवन मे कभी हार नहीं माननी चाहिए। 

*क्योंकि कोको कोला की 25 बोतल बिकी थी पहले साल में।* 

यदि वह हार मान जाते तो आज वह कहीं भी किसी को भी व्यापार करने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते।

हां मैं यह भी जानती हूं व्यापार को खड़ा करने में सबसे बड़ी बाधा अपने ही होते है।  

यदि व्यापार को खड़ा करना है, तो उसकी सफलता का रास्ता बाजार से होकर ही गुजरता है।

मेरे स्वर्गीय ससुर जी अक्सर कहां करते थे। 

पैसा बाजार में बिखरा पड़ा है, जरूरत है उसको बटोरने वाले की।

मेरे पति ने भी व्यापार को खड़ा करने के लिए बाजार को ही अपना रास्ता बनाया है।

परंतु कहीं ना कहीं वह अभी सफल नहीं हो पाए। 

हो सकता है उनके व्यापारिक सोच मे कमी हैं। 

राजेश्वरी ने पूछा यदि उनके व्यापारिक सोच में कमी है। 

तो तुम उन्हें सही मार्गदर्शन क्यों नहीं देती। 

मैंने कहा हर इंसान को अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी पड़ती है। 

मैं यदि उन्हें मार्गदर्शन दूंगी तो वह अनुचित होगा। 

राजेश्वरी ने पूछा वह कैसे पुष्पा ने कहा क्योंकि वो व्यापारिक ज्ञान में भी ग्राहक से जुड़े हुए हैं।

वह ग्राहक से किस प्रकार व्यापारिक बातचीत करते हैं। वह उनकी अपनी दूरदर्शिता है। वह उनकी अपनी समझदारी है। वह उनकी अपनी सोच है।

हां वह बता रहे थे उनके अड़ोस पड़ोस में कोई भी उनसे ₹1 का सामान नहीं खरीदता। 

उनके ऑफिस में भी कम ही ग्राहक बने हुए हैं।

जिसके कारण यह साबित होता है। वह नौकरी करते हैं उन्हें तनख्वाह मिलती है। यहां तक तो सब ठीक है। 

परंतु वे अपने ये नहीं चाहते उनके बीच में से ही कोई निकल कर व्यापारी बन जाए। 

वह यह हरगिज नहीं चाहते उनका अपना करीबी अमीर बन जाए। 

ना वह स्वयं से प्रयास करते हैं। अमीर बनने का ना वे यह बर्दाश्त कर पाते हैं। कोई उनका अपना अमीर व्यक्तियों में चुना जाए।

कोई उनका अपना अमीर बन जाए।

पुष्पा ने कहा वे मन ही मन सोचते हैं। ना हम खुद अमीर बनेंगे ना किसी को अमीर बनने देंगे। 

उनकी इसी सोच पर मेरे पति अफसोस कर रहे हैं।

मेरे पति मान का मानना है। यदि 5% पर अपना नाम दर्ज करवाना है। तो व्यापार करना ही पडेगा। 

यदि सफलता प्राप्त करनी है। तो ग्राहक की ना नुकुर से कभी हार नहीं माननी है। वे अच्छी तरह जानते है ग्राहक भगवान है। 

इसीलिए भगवान को रुष्ट भी नहीं किया जा सकता।

उनकी हां सुनने से मन प्रसन्न चित अवश्य होता है। 

तो उनकी ना सुनने से परहेज नहीं करना चाहिए।

क्योंकि बंद पड़ी घड़ी भी पूरे दिन में दो वक्त सही समय बताती है। 

पुष्पा ने और गंभीर होते हुए कहा यदि मेरे पति को 5% व्यक्तियों में अपना नाम दर्ज करवाना है।

तो उन्हें कड़ी मेहनत करनी ही होगी। 

यदि मेरे पति को पांच प्रतिशत व्यक्तियों में अपना नाम दर्ज करवाना है। 

तो उन्हें कड़ी मेहनत के साथ-साथ धीरज को बनाए रखना होगा।

यदि मेरे पति को 5% व्यक्तियों की सूची में अपना नाम दर्ज करवाना है। 

तो उन्हें लगातार लोहार की तरह गर्म लोहे पर चोट करना ही पड़ेगा। 

यदि मेरे पति 5% में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं। तो उन्हें सुनार की तरह सोने पर धीरे धीरे नक्काशी करनी ही होगी। 

क्योंकि बड़े-बड़े उद्योगपति गवाह है। 

एक रात में कोई लक्ष्मी मित्तल नहीं बन सकता।

उद्योगपति अंबानी जो अपने गांव से एक लोटा और दरी लेकर मुंई आए थे।

आज बिजनेस टाइकून में उनका नाम सम्मिलित है।

यह सब बताने का तात्पर्य है जो भी अपना बिजनेस करना चाहता है। 

उसे इन कसौटियों से होकर गुजरना ही पड़ेगा। 

पुष्पा ने कहा मेरे लाख मना करने के पश्चात उनकी जिद है व्यापार करने की जिसमें सम्मिलित है सुबह से लेकर रात तक के उत्पाद। 

वे आपके स्वास्थ्य को लेकर बहुत ही उत्साहित हैं। 

पुष्पा ने कहा जिस प्रकार हर रात के पश्चात सुबह होना निश्चित है। 

उसी प्रकार उन्होंने अपनी नकारात्मकता पर सकारात्मक सोच की विजय प्राप्त की है। 

जिसके परिणाम स्वरुप उन्होंने पर्वत की तरह जिद ठानी है।

वह आने वाले समय में अपना नाम 5% की सूची में दर्ज अवश्य करवाएंगे।

चाहे उसके लिए उन्हें कितनी ही असफलताओं का सामना क़्यू ना करना पड़े।

जबकि वे असफलताएं नहीं है। वे अनुभव रूपी वह मार्गदर्शन है। जो दर्शाती हैं आपकी मेहनत आपकी सोच सही दिशा में कार्य नहीं कर रही। इसे बदलने का समय आ चुका है। 

अपनी योजनाओं को अपनी कड़ी मेहनत को अपनी सोच को दूसरी दिशा में लगाए। 

जिससे की सफलता आपके कदम चूमे। 

क्या आप थॉमस एडिसन को नहीं जानती राजेश्वरी।

उससे पहले राजेश्वरी कुछ कह पाती पुष्पा ने कहा वह हमें प्रेरित करते हैं। 

थॉमस एडिसन सात सौ बार असफलता का मुंह देख चुके थे। उसके पश्चात जब उन्हें पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त हुई।

तो रोशनी बिजली प्रकाश चीख चीख कर उनकी सफलता की गाथा का ढिंढोरा आज भी पीट रहे हैं।

पुष्पा ने कहा राजेश्वरी अब्राहम लिंकन अनेकों असफलताओं के पश्चात वह अमेरिका का सोलवा राष्ट्रपति बना।

पुष्पा ने कहा मुझे विश्वास है अपने पति का विश्वास देखकर वह एक दिन 95% की दौड़ से निकलकर 5% की सूची में अपना नाम अवश्य दर्ज करवाएंगे।

मैं भगवान राधे कृष्ण से प्रार्थना करती हूं। 

वह जल्द से जल्द अपने व्यापारिक जीवन में सफल होय। 

मैं जानती हूं जो समाज आज उन्हें ऊपर उठने के लिए रास्ता नहीं दे रहा है। 

कल यही समाज उन्हें उनकी सफलता पर अपनी पलकों पर बिठाएगा। 

राजेश्वरी ने पुष्पा की बातों का समर्थन करते हुए कहा पुष्पा आपके पति को कड़ी मेहनत के साथ-साथ अपने हो या पराए उनके साथ व्यापारिक संबंध बनाने ही पड़ेंगे।

जिससे उनकी सफलता और भी सुगम हो जाएगी। 

वह आपकी प्रार्थना के अनुसार जल्द से जल्द 95% की सूची से निकलकर 5% में अपना नाम अवश्य दर्ज करवाएंगे।

मैं आपको और आपके पति को सिर्फ इतना ही कह सकती हूं।

विश यू हेल्थ विश यु वेल्थ। 


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