Sameer Faridi

Horror


3.9  

Sameer Faridi

Horror


13 मौतें

13 मौतें

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"काफी देर हो गई है, अब क्या करेंगे हम लोग ?"

रितिका अपने प्रेमी रोहन से बोली।

"चिंता मत करो कोई न कोई लिफ्ट दे देगा।"

रोहन रितिका को दिलासा देते हुए बोला।

"यार इस गाड़ी को भी यहीं बन्द होना था।"

रितिक की फ्रेंड पूजा अपना गुस्सा गाड़ी पर दिखाते हुए बोली।

"यार गाड़ी है कहीं भी बंद हो सकती है अब इसमें हम लोग क्या कर सकते हैं ?"

पूजा का प्रेमी विनय गुस्सा करते हुए बोला।

"ठीक है गाइस बस करो, अब तुम लोग शुरू मत हो जाना।" रोहन सबको समझाते हुए बोला।

  रात के 3 बजने वाले थे । रोहन,रितिक,विनय,पूजा अपने करीबी दोस्त कबीर की जन्मदिन की पार्टी से वापस घर आ रहे थे। कबीर का घर शहर से काफी दूर था । शहर पहुंचने के लिए उन्हें तकरीबन 2 घण्टे का समय और लग सकता था, पर बीच रास्ते में ही उनकी कार किसी कारणवश बन्द हो गयी थी। रोहन के लाख जतन करने के बावजूद भी वो स्टार्ट नहीं हो पा रही थी। रास्ता काफी सूनसान एक जंगल के बीचो-बीच से गुजरता था। जहाँ दूर-दूर तक किसी का नामोनिशान नहीं मिल रहा था । आधे घण्टे से ज्यादा समय बीत चुका था पर एक भी वाहन उधर से नहीं गुज़रा था। और अभी रास्ता भी लम्बा तय करना था। सब धीरे-धीरे परेशान होने लगे थे, सुबह चारों को ऑफिस भी पहुँचना था ऑफिस के लिए ही वो लोग पार्टी को आधा-अधूरा छोंड़कर घर के लिए निकले थे पर उन्हें क्या पता था कि आज के बाद वो कभी ऑफिस देखने को नहीं पायेंगे।

समय के साथ-साथ उनकी परेशानियां धीरे-धीरे बढ़ने लगी थीं। उनके मोबाईल फोन भी काम करने बंद कर दिए थे उनकी समझ मे कुछ भी नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। वो सब सोंच-विचार में पड़े थे कि तभी किसी तरह की एक तेज आहट उन्हें सुनाई दी। वो सब घबरा गए।

"ये..ये क्या था ?" रितिका डरते हुए बोली।

रोहन और विनय गाड़ी के बाहर झाँक कर देखने लगे।

"पता नहीं क्या था।" विनय ने जवाब दिया।

"शायद कोई जानवर होगा।" रोहन अंदाजा लगाते हुए बोला।

"यार बहुत अजीब सा जानवर था।" रितिका ने कहा।

किसी ने कोई प्रितिक्रिया नहीं दी। सब फिर अफसोस भरे अंदाज़ में बैठे रहे । तभी अचानक किसी ने जोर से गाड़ी के पिछले हिस्से को उठा कर पटक दिया। सभी की चीखें निकल गई सब डर के मारे एक साथ गाड़ी के बाहर आ गए। रोहन और विनय ने फटाक से मोबाईल की टॉर्च जलाई और गाड़ी के पिछले हिस्से का जायजा लेने के लिए चल दिए। रितिका और पूजा डरी और सहमी हुई उनसे दूर खड़ी थीं। दोनों दबे पाँव आगे बढ़े।

"रोहन रहने दो मत जाओ।" रितिका डरते हुए बोली।

"शशशशश....।" रोहन ने अपनी होठों पर उंगली रखकर रितिका को शांत रहने का संकेत दिया और फिर आगे बढ़ गया। दोनों गाड़ी के पिछले हिस्से तक पहुंचे तो देखा वहां कुछ भी नहीं है। विनय ने हिम्मत करके गाड़ी के नीचे चेक किया पर वहाँ भी उसे कुछ नहीं दिखा।

"यहां तो कुछ भी नहीं है।" विनय ने कहा।

रितिका और पूजा दौड़कर उनके पास आ गयीं दोनों काफी डरी हुई थी।

"ऐसा कैसे हो सकता है ? कुछ न कुछ तो ज़रूर था जिसने कार को इतना हिला कर रख दिया ।"

पूजा ने पूरे यकीन से कहा।

"हाँ, शायद कोई बड़ा जानवर था, इस बीराने में गाड़ी की जलती लाइटें देखकर अपना आपा खो बैठा हो।"

रोहन इधर-उधर देखते हुए बोला।

वो सब कुछ और बोलते इससे पहले उन्हें दूर सड़क पर एक रोशनी नज़र आई । एक बस तेजी से हॉर्न बजाती हुई उनकी तरफ दौड़ती चली आ रही थी। बस को अपनी तरफ आते देख चारों के जान में जान आई। वो सब जल्दी-जल्दी अपनी ज़रूरी चीजें कार से लेने लगे। रोहन ने गाड़ी को फटाक से लॉक किया और अपना बैग लेकर चलने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा तभी अचानक उसकी नज़र गाड़ी के सामने वाले शीशे पर पड़ी। ऐसा अजीब मंज़र देखकर वह थोड़ा सहम गया। पास जाकर उसने देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। शीशे पर खून से कुछ लिखा था, ये देखकर उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ, एक दम साफ और सटीक शब्दों में लिखा था....'मौत का सफर'।

वो उन लिखे शब्दों को ध्यान से देख रहा था तभी दूर खड़े उसके दोस्तों ने आवाज दी- "आना जल्दी !"

उसने वहां से अपना ध्यान हटाया और उनकी तरफ चल दिया। रोड के एक साइड जाकर वो रितिका के पास खड़ा हो गया और बस को अपनी ओर आते देखने लगा।

बस आकर ठीक उनके सामने खड़ी हो गई। सब एक-एक करके उसमें चढ़ने लगे। रोहन अभी भी कुछ सोंच में डूबा था। 

"क्या हुआ आओ ना ?" रितिका बस पर चढ़ते हुए बोली।

"हमने हाथ भी नहीं दिया तो ये बस ठीक हमारे सामने क्यों आकर रुक गयी?"

रोहन ने कहा।

"ये कैसा सवाल है, हम इसीलिए तो यहाँ खड़े थे।"

रितिका बस के पायदान पर खड़ी थी। विनय और पूजा बस के अंदर जा चुके थे।

"...हमें बस की जरूरत थी या बस को हमारी ?" रोहन ने फिर कुछ सोंच कर कहा।

"...रोहन प्लीज़....अपना माइंड बाद में चला लेना, अभी जल्दी करो प्लीज़ ! ऊपर आओ!"

इतना कहकर रितिका भी अंदर चली गई। रोहन भी उसकी बात मनाते हुए उसके पीछे चल दिया।

अंदर पहुंच कर उसने बैठने के लिए एक सीट चुनी और रितिका के साथ बैठ गया। विनय और पूजा पीछे वाली सीट पर बैठे हुए थे। पूरी बस में सिर्फ एक लाइट जल रही थी वो भी सिर्फ ड्राइवर के पास। रोहन अपनी जगह पर खड़ा हुआ और इधर-उधर नज़र दौड़ाकर उसने देखा बस में केवल 10 लोग ही बैठे हुए हैं वो भी सब के सब आँख बंद किए हुए शायद सो रहे थे।

"क्या हुआ, क्या ढूंढ रहे हो ?" रितिका ने पूछा।

"कोई टिकट वग़ैरा नहीं पूछ रहा है, पता नहीं कंडेक्टर कौन है ?"

रोहन ने चिंता भरे स्वर में कहा।

"बैठे रहो सबका टिकट कटेगा।" सामने की थोड़ा दूर वाली सीट पर से एक अधेड़ उम्र के आदमी ने जवाब दिया।

"कब ?" रोहन ने उससे ही पूछा।

"शहर पहुँचने से पहले सबका टिकट कट जायेगा।" वो आदमी अभी भी वैसी ही स्थिति में बैठा हुआ था। बिना देखे वो हर सवाल का जवाब दीए जा रहा था।

रोहन को भी उसकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं हुई इसलिए वो भी चुप हो गया। रितिका ने भी अपनी आंखें बंद कर ली थी। रोहन अभी भी उस बात को लेकर कहीं खोया हुआ था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसने अपना मोबाइल निकाला और उसमें कुछ देखने लगा तभी अचानक चलते-चलते मोबाइल स्वयं बंद हो गया और एक नए नम्बर से कॉल आई। रोहन ने कॉल उठाई- "हैल्लो कौन?"

कोई जवाब नहीं आया। रोहन ने फिर पूछा

"हैल्लो कौन बोल रहा है ?"

उधर से जवाब आया-"मैं बस का ड्राइवर बोल रहा हूँ।"

रोहन कुछ समझ नहीं पाया।

"कौन ड्राइवर ? कौन-सी बस ?"

"जिस बस में तुम सफर कर रहे हो उसी बस का ड्राइवर, आज से ठीक 15 साल पहले इस बस का एक्सीडेंट हो चुका है और मेरे साथ-साथ इसमें बैठे सभी यात्री मर चुके हैं।"

"क्या बकवास कर रहे हो, कौन बोल रहे हो ?"

रोहन गुस्से में उठकर खड़ा हुआ और सामने देखा तो होश उड़ गए, ड्राइवर की सीट खाली थी। बस अपने आप ही दौड़ती चली जा रही थी। ये मंज़र देख उसके आंखों के तले अंधेरा छा गया। उसने पलट कर इधर-उधर देखा तो बस में सिर्फ वही चार जन बैठे हुए थे बाकी की पूरी बस खाली थी। अचानक उसकी नज़र बस के सामने के शीशे पर पड़ी जिस पर वही शब्द खून से लिखे हुए थे..'मौत का सफर'...

वो काफी डर गया सामने की सीट पर जहाँ कंडेक्टर बैठा हुआ था वहाँ एक अख़बार रखा हुआ है रोहन ने डरते हुए उस अख़बार को लपक कर उठा लिया। अखबार एक दम नया था उसने अख़बार की डेट पर नज़र दौड़ाई उसके होश उड़ गए...१२ जुलाई २००५ . 

अखबार उसके हाथ से छूट कर नीचे जा गिरा। उसने जल्दी-जल्दी सबको जगाया। बिना ड्राइवर की चलती बस को देख कर तीनों की नीदें उड़ गयीं। रितिका और पूजा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगीं। विनय दौड़कर गया और ड्राइवर की सीट पर जाकर बैठ गया ताकि बस को कंट्रोल कर सके पर बस की रफ्तार काफी तेज थी उसे कंट्रोल कर पाना मुश्किल हो रहा था।

"बस कंट्रोल नहीं हो पा रही है।"

विनय ज़ोर से चिल्लाया ।

"कैसे भी करके कंट्रोल कर ।" रोहन चिल्लाते हुए बोला।

"ऐसा करो तुम लोग एक-एक करके बस से कूद जाओ।"

विनय हारते हुए बोला।

बस की रफ्तार और तेज होती जा रही थी। 

"बस बहुत तेज है, कूदेंगे तो शायद हम जिंदा भी न बचे।"

रितिका रोते हुए बोली।

"अगर स्पीड ऐसे ही बढ़ती रही तो वैसे भी हममें से कोई जिंदा नहीं बचेगा, इससे अच्छा जोख़िम ही उठाया जाए।"

विनय किसी भी तरह बस को रोक नहीं पा रहा था।

विनय की बात में रोहन को ज़रा सी सच्चाई नज़र आई और वह उसकी बात मान कर सब को लेकर बस के गेट की तरफ चल दिया। वो जैसे ही गेट पर पहुंचा खटाक की आवाज के साथ गेट अपने आप ही बंद हो गया। रोहन जोर-जोर से गेट को पीटने लगा पर दरवाजा टस से मस न हुआ। तीनों ने मिलकर दम लगाया मगर दरवाजा खुलने के बजाए अपनी जगह से हिला तक नहीं। 

"दरवाजा नहीं खुल रहा है।" रोहन चिल्लाते हुए बोला।

बस की स्पीड और तेज होती जा रही थी अनियंत्रित बस को देखकर विनय ने स्टेरिंग को वैसे ही छोड़ दिया और दरवाजे को खोलने के लिए हाथ बटाने लगा। उसने जैसे ही दरवाजे में हाथ लगाया बस की एक मात्र जलती हुई लाइट भी अपने आप बन्द हो गईं और उसमें पूरी तरह अंधेरा छा गया। ये देखकर वो सब और डर गए। सब सिमट कर एक पास आ गए। अचानक कई लोगों की चीखने-चिल्लाने की आवाजें पूरी बस में गूँजने लगी। वो चारों डर के मारे रोने लगे। वो समझ गए थे ये सफर सच मे उनके लिए मौत का सफर बनता जा रहा है। बस झूमती-झामती तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ती चली जा रही थी रोहन और विनय ने हिम्मत करके फिर से गेट को धक्का देना शुरू कर दिया मगर उनका प्रयास शायद बेवजह ही था अचानक एक पेड़ टूटकर बस के ऊपर आ गिरता है और बस पूरी तरह से अपना नियंत्रण खो देती है । तेज रफ्तार की वजह से बस पलट जाती है और एक रॉकेट की तरह बढ़ती हुई गहरी खांई में जा गिरती है। सिर्फ उन चारों की चीखें ही सुनने को मिलती हैं। बस और वो चारों देखते-देखते ना जाने कितनी गहराई में जा चुके होते हैं। बस के अंदर रखा अखबार वहीं सड़क पर ही पड़ा रहा जाता है जिस पर साफ-साफ शब्दों में एक बड़ी हेडलाइन लिखी हुई होती है ....' बस दुर्घटना में ड्राइवर और गर्भवती महिला समेत 13 लोगों की मौत।'


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