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Sunil Agrahari

Drama

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Sunil Agrahari

Drama

ज़ूम ऐप की महिमा

ज़ूम ऐप की महिमा

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सिमटी हुई दुनिया आज फैल रही ज़ूम पर रुकी ज़िन्दगानी आज भाग रही ज़ूम पर।

लॉक डाउन में अनलॉक हो रहे ज़ूम पर बैठे बैठे घर में दुनिया ,घूम रहे ज़ूम पर।

हाफ पैंट कोट टाई , पहन चले ज़ूम पर चप्पल में मीटिंग, अटेंड करे ज़ूम पर।

वेबिनार की बाढ़ देखो आ रही ज़ूम पर ज्वाइन कर ऑनलाइन सो रहे ज़ूम पर। 

झाड़ू पोंछा घर में, ऑफ़ कैमरा ज़ूम पर म्यूट अनम्यूट भूले, बातें, आउट हुई ज़ूम पर।

स्कूल ऑफिस का अखाड़ा घर, बना ज़ूम पर बॉस सबको तंग करे , चौबीस घण्टे ज़ूम पर। 

शादी और, बरही तेरही, हो रही है ज़ूम पर बच्चे पैदा, छोड़ सब, हो रहा है ज़ूम पर।

जिसे देखो, फ़्री में गुरु, बना हुआ ज़ूम पर कोरोना से बचाव, ज्ञान बाँट रहा ज़ूम पर।

छुए ,अनछुए लोग, हो रहे है, ज़ूम पर कोरोना का रोना लोग रो रहे है ज़ूम पर।

सियासत की बिसात देखो बिछ रही ज़ूम पर आंदोलन वाली टूलकिट बन रही ज़ूम पर। 

ज़ूम का मालिक नोट छाप रहा झूम कर कोरोना को दुआएं, दिल से दे रहा है झूम कर। 

दवा और खाना काश मिल जाये ज़ूम पर कसम खुदा की खुदा मिल जाये ज़ूम पर।


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