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Neena Ghai

Romance

3  

Neena Ghai

Romance

ज़ख्म

ज़ख्म

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ज़ख्म इतना गहरा था कि

किसी से ज़िक्र न कर पाया 

दर्द इतना गहरा था


कि कभी भर ही न पाया

आँख तो नम न थी

पर दिल था ज़ार ज़ार था रोया


तेरी परेशानियों की वजह ढूँढते ढूँढते

अपने को परेशान था पाया

क्या बतलाएं तेरी मुहब्बत ने 


हमें एक नया

अंदाज़ है सिखाया l 


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