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Ratna Kaul Bhardwaj

Drama

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Ratna Kaul Bhardwaj

Drama

ज़िन्दगी तू और तेरे गम

ज़िन्दगी तू और तेरे गम

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अपने आप पर सितम ढाते आये हैं वर्षों 

ज़िन्दगी हम तेरे गम उठाते आये हैं वर्षों। 


रुला देता हैं ज़माना हमें बार-बार 

और अश्कों को हम पीते आये हैं वर्षों।


अरमान मेरे दिल के बदलते गए हैं

और यह ज़िंदा लाश उठाते आये हैं वर्षों। 


कोई दो कदम भी मेरे साथ न चल सका 

ज़िन्दगी तन्हा हम बिताते आये हैं वर्षों।


हम रो भी दें तो हँस देता है ज़माना

ज़माने के चलाये तीर खाते आये हैं वर्षों। 


अब तो न खुद से रंजिश न ही ज़माने से 

अब तो वही निभाएंगे जो निभाते आये हैं वर्षों। 


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