STORYMIRROR

Swati Tyagi

Romance

3  

Swati Tyagi

Romance

ज़िन्दगी की उलझन

ज़िन्दगी की उलझन

1 min
330

एक उलझन है उस पल में जिस पल तेरा साथ नहीं

जी भी लेते हैं तुम बिन और जिया जाता भी नहीं

साँसों के संग ज़िन्दगी चलती तो रही

पर पता नहीं कब जीना भुला गयी

 

तब हमारी आँखें नाम होती थीं हँसते हुये

अब याद नहीं कितना वक़्त गुज़रा है हमको हँसे हुये 

एक उलझन है उस पल में जिस पल तेरा साथ नहीं

जी भी लेते हैं तुम बिन और जिया जाता भी नहीं

 

तुम भी हो, खुशी भी है पर बेफ़िक्री नहीं

आँखों में नमी लाने वाली हंसी अब होंठों पे खिलती नहीं

एक उलझन है उस पल में जिस पल तेरा साथ नहीं

जी भी लेते हैं तुम बिन और जिया जाता भी नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance