Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

उम्र

उम्र

1 min 344 1 min 344

बचपन की मासूम हँसी

प्यारी सी आसान ख़ुशी

जाने कहाँ खो गयी ज़िन्दगी


बचपन में आसानी से होने वाला भरोसा

झट से माफ़ कर देने की क्षमता

पता ही नहीं कब वो वक़्त बीता


न किसी को समझने की ललक थी

न किसी को परखने की ज़रूरत थी

बस वो ही अपना हो गया

जो भी हमसे हँस के मिला

जाने कहाँ खो गया वो आसान भरोसा


बहुत कुछ सिखा दिया उम्र ने

भुला दिए वो मासूम लम्हे

मन के तराज़ू में तोलते हैं

हर दिन सोचते हैं

इस उम्र की क़ीमत उस

उम्र से कितनी कम थी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Swati Tyagi

Similar hindi poem from Abstract