STORYMIRROR

Swati Tyagi

Others

2  

Swati Tyagi

Others

अंधेरा

अंधेरा

1 min
220

आँखें खुलीं तो कुछ अनदेखा 

दिखा

रौशनी के पीछे अंधेरा दिखा

घबरा के मैंने आँखें मूंद लीं

खुद को तसल्ली भी दी

सपना ही था जो भी दिखा

जागने पे होगा सवेरा खिला

 

फ़िर आँखें खुलीं तो कुछ 

अनदेखा दिखा

रौशनी के पीछे अंधेरा दिखा

 

आँखें खुलीं तो ये 

बात सामने आयी

रात में भी है सुबह 

जितनी सच्चाई

कुछ बातें ज़िन्दगी ने 

सवेरे में सिखायी

कुछ रातों के लिए बचायी

फ़िर अंधेरों से कैसा गिला

मुस्कुरा के बाहें फैला दी 

इस बार जब अंधेरा दिखा



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन