STORYMIRROR

Shweta Mangal

Classics

4  

Shweta Mangal

Classics

ये शाम

ये शाम

1 min
357

ये शाम जब आती है

अपने साथ लाती है


यह रंगीन आसमान

छितराये बादलों में

छुपता सूरज

जैसे माँ के आँचल में

 छुपता लाल 


और यह खिलखिलाता चाँद

 खेलता असंख्य तारों से

 जैसे खेलते बाल कृष्ण

गोपियों संग


और इसी के साथ आ जाती है

कुछ यादों की लहरें

दिल के शांत समंदर में

होले से हिचकोले लेते हुये


ये यादें तोड़ सा जाती है

तो कभी जोड़ भी जाती है

 दूर उन सब अपनों से रहते हुए 


बहुत जालिम है यह शाम

जब भी पाया अकेला खुद को

तो रुला जाती है

और जब हो साथ किसी का

 तो हँसा जाती है


कोई भी नहीं बच पता

 इसकी रंगीनियों व तन्हाइयों से


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Shweta Mangal

Similar hindi poem from Classics