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Shweta Mangal

Tragedy


5.0  

Shweta Mangal

Tragedy


वफ़ा

वफ़ा

1 min 288 1 min 288

वफ़ा का यही सिला मिलता है

यह कोई तो बता देता हमें

यह कोई तो समझा देता हमे

यह शिकवा तो न रहता हमें

कि अनजान थे हम इससे


जब ढाते रहे वो जुल्म हमपे

सहते रहे हम

उनको नासमझ समझकर

परन्तु अब इम्तहां की हद थी 

हमें दूर करके सबसे

बीच भंवर में


बिना किसी साहिल के छोड़

वो हमसे किनारा कर गए

और सोचा भी नहीं

पल भर भी हमारे लिये।


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