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Shweta Mangal

Romance


5.0  

Shweta Mangal

Romance


तुम ही तुम

तुम ही तुम

1 min 271 1 min 271

तुम ही तुम इस दिल में

बसते चले गये

तुम ही तुम इस दिल पे

छाते चले गये


कितना चाहा रोक सकूँ

अपने दिल की इस खता को

परन्तु यह तुम्हारी अदाओं पर

निसार होता चला गया


कितना चाहा थाम लो

तुम मेरे हाथ को

संभाल लो मुझे गिरने से

 

पर तुमने यह खता भी न की

और तुम्हारी इन्हीं अदाओं पर

यह दिल कुर्बान होता चला गया


काश कभी तो तुम

कोई खता कर देते

कभी तो दिल की बात

जबान पर लाते


पर तुम आँखों - आँखों में ही

इशारे करते रहे

और दिल में बसते चले गये


क़ाश तुम कोई खता कर देते

क़ाश तुम इस ख़ामोशी को तोड़ देते

क़ाश तुम दिल के जज़्बात मुझसे कह देते।


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