ये प्यारी बेटियाँ
ये प्यारी बेटियाँ
यह हुनर माँ के पेट से ही सीख कर आती हैं,
बेटियाँ ही चारदीवारी को घर बनाती हैं।
फिर भी इनके हिस्से नहीं आता वह घर,
बेशक आबादी का आधा हिस्सा यही कहलाती हैं।
गृहणी हो या कामकाजी,अपना सर्वस्व उस पर लुटाती हैं,
दीवारों का रंग,खिड़कियों के पर्दे, सब प्यार से चुन-चुन सजाती हैं।
घर की नेम प्लेट पर नाम नहीं होता इनका,
जबकि अपनी उम्र का अनमोल हिस्सा उसमे बिताती हैं।
बस कोई प्यार से बोल दे,घर बहुत प्यारा सजाया है,
तो चेहरे पर गर्व भरी प्यारी मुस्कान से ही खिल जाती हैं।
हाँ....बेटियों, ये हुनर माँ के पेट से ही सीखकर आती हैं।
