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Harish Bhatt

Tragedy

3  

Harish Bhatt

Tragedy

यात्रा

यात्रा

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मैंने अपने दर्द को

दूर किया जिनके सहारे

आज वह चले गए

हमसे ही दूर

अनंत की यात्रा पर


जाने वाले

हम तुम्हें यूं न भुला पाएंगे

जब-जब सुनेंगे आवाज तुम्हारी

तब-तब बहुत रूलाओगे

‘जग जीत’ छोड़ गए जग को

हर आँख नम है

हर दिल रो रहा

न जाने कहां तुम चले गए


वो कागज की कश्ती

वो बारिश का पानी

सब कुछ याद आ गया

महसूस किया हर दर्द आपने

क्या होता है प्यार

क्यों होता है बिछोह

सरहदें भी न रोक सकीं जिसको

आज वो परिंदे की मानिंद

चला गया दूर गगन में

न जाने कौन से देश

हम तुम्हें यूं न भुला पाएंगे

जब-जब सुनेंगे आवाज तुम्हारी

तब-तब बहुत रूलाओगे...


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