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Madhuri Jaiswal

Abstract

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Madhuri Jaiswal

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याद है

याद है

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वो वक्त भूल गए तुम,

पर मुझको हर लम्हा याद है।

मंजिल मिले न मिले पर, 

वो हर गली हर रस्ता याद है।


सूख गए वो बाग खूबसूरत,

पर उसका हर पत्ता याद है।

ख्वाब मुक्कमल न हुए जो, 

आंखों में अश्कों का वो समंदर याद है। 


मेरे दिल की बेवफाई का इल्म है मुझे, 

मेरा होकर भी किसी और के लिए

धड़कना याद है। 


जहां खड़े थे साथ हम, 

आज वहां अकेला होना याद है। 

उजाले बहुत देखे थे हमने 

पर जिंदगी का हर अंधेरा याद है, 


फिर होगी रौशनी जीवन में, 

आशा का चमकता वो सूरज याद है। 


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