याद आ गई...
याद आ गई...
तुम मुझे भा गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
छाए थे काले बादल ग़मों के,
तुम्हारा स्पर्श घेरा बन मुझपर छा गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
रात काली, दिन धुंधले से लगते थे,
मेरी रौशनी तुम थी,
मेरा सूरज बन तुम आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
तन्हाई के थपेड़ों से उजड़ा था मैं,
बन बसंत की बहार तुम ज़िन्दगी में छा गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
जिस दौर के लिए बेचैन था अबतक,
उसी दौर को बाकायदा साथ ले तुम आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
मुसल्सल एक उधरी सी जिंदिगी थी कभी,
खुश है वो जिंदिगी की उसकी तुरपाई आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
प्यासा बन जो भटकता रहा अबतक,
नदी बन तुम खुद मेरे पास आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
चकोर था मैं, चाँद की दरकार थी,
बन चाँद तुम मेरे पास आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई
आख़िर "दीपक" अकेले जलता कैसे,
साथ देने बन "बाती" तुम आ गई,
देखो न ! तुम्हारी याद मुझे आ गई।

