व्यवहार
व्यवहार
नेग रिवाज
सब बातें हैं संस्कारों की,
परम्पराओं की
पीढ़ी दर पीढ़ी चलती
खानदान का नाम करती।
जो बच्चे बढ़ो से सीखते
वे संस्कारी कहलाते।
मन, तन, धन तीनों बढ़ जाते
जो सोच विचार,व्यवहार करते।
जैसा होगा जिसका व्यवहार
वैसा मिलेगा उसे प्रतिकार।
ताली एक हाथ से नहीं बजती
मिलकर कदम बढ़ता है।
स्वार्थ त्यागकर जीवन में
प्रगति का मार्ग मिलता है।
प्यार से प्यार ही पलता
ईर्ष्या द्वेष कलह उपजता।
गर जीवन को श्रेष्ठ बनाना है
सरस व्यवहार अपनाना है।
सम्मान देना, यदि लेना चाहो
प्यार बाँटना, गर पाना चाहो।
