STORYMIRROR

yogita singh

Romance

2  

yogita singh

Romance

वो जहां है मेरा

वो जहां है मेरा

1 min
153

एक दिन उस शख्स से बात नहीं हुई

तो एक बात समझ आई

वो जहां है मेरा

जिसकी आवाज में मेरा सुकून कैद है

उसकी मौजूदगी

मुझे जिंदा रहने का एहसास कराती

उसके साथ मै ख़ुद से खुद में मिल पाती हूं

मै जैसी हूं वो वैसा स्वीकार करता है

वो मुझे बदल के नहीं

मै जैसे हूं वो वैसे स्वीकार करता है ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance