वो एक सफर
वो एक सफर
ऑफिस का टूर
ट्रेन का सफर
सफर में दो थे अनजाने
चुपचाप बैठे थे
मोबाइल के बहाने
धीरे से फिर बात हुई
आँख हमारी चार हुई
आँखों की बातें कब
मन के पार हुईं।
आज उसी अनजानी
द्वारे मेरी बारात चली।
ऑफिस का टूर
ट्रेन का सफर
सफर में दो थे अनजाने
चुपचाप बैठे थे
मोबाइल के बहाने
धीरे से फिर बात हुई
आँख हमारी चार हुई
आँखों की बातें कब
मन के पार हुईं।
आज उसी अनजानी
द्वारे मेरी बारात चली।