Amit Kumar
Abstract
विश्वास में
विष भी है
और आस भी है
अब जिस में
जो अधिक होता है
वो वही बटोरता है।
उम्मीद
सदक़ा
नायाब
शिद्द्त
सदा मेरी राहो...
जो तुमने दिया...
सदा के लिए......
तुम चाँद हो स...
पलकों की चिलम...
मेरे शब्द
ज़िंदगी देने की क्षमता नहीं तो क्यों करते हैं इनका भक्षण। ज़िंदगी देने की क्षमता नहीं तो क्यों करते हैं इनका भक्षण।
पाना चाहता हूँ मेरी मंजिल का छोर, थाम कर इन्हीं यादों का हाथ। पाना चाहता हूँ मेरी मंजिल का छोर, थाम कर इन्हीं यादों का हाथ।
हमें भी बुला चाय-पार्टी देना, नजराना खुशनुमा सुहाना। हमें भी बुला चाय-पार्टी देना, नजराना खुशनुमा सुहाना।
नहीं तो भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में जीवन भी मेज़ की तरह अस्त व्यस्त हो जाना है ॥ नहीं तो भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में जीवन भी मेज़ की तरह अस्त व्यस्त हो जाना ...
यहाँ जीता है मरता है, कौन किस के लिये, यहाँ जीता है मरता है, कौन किस के लिये,
काली स्याही से श्वेत पत्र रंग जाऊं मैं। हां सोच रहा था कविता एक बनाऊं मैं।। काली स्याही से श्वेत पत्र रंग जाऊं मैं। हां सोच रहा था कविता एक बनाऊं मैं।।
किसी के जाने से बस कुछ पल का विराम लग जाता है किसी के जाने से बस कुछ पल का विराम लग जाता है
जब मुझसे नहीं वास्ता, क्यों मुझको सुनाती हो दर्द यार। जब मुझसे नहीं वास्ता, क्यों मुझको सुनाती हो दर्द यार।
हमारा सब कुछ छीन लेने का सम्मोहक प्रयास हमारे चारों ओर सक्रिय हो। हमारा सब कुछ छीन लेने का सम्मोहक प्रयास हमारे चारों ओर सक्रिय हो।
पानी की पिचकारी उस पर मारकर मानसून की होली उसके संग खेल लूंगी। पानी की पिचकारी उस पर मारकर मानसून की होली उसके संग खेल लूंगी।
परिस्थिति जैसी करवाती है व्यक्ति वैसा करता है। परिस्थिति जैसी करवाती है व्यक्ति वैसा करता है।
माँ की जगह न कोई पूरी कर सकता है, और न कोई पूरी कर पाएगा। माँ की जगह न कोई पूरी कर सकता है, और न कोई पूरी कर पाएगा।
जन पीड़ाएं दूर करने को तभी कर्तव्य मानते हैं आधुनिक भूप। जन पीड़ाएं दूर करने को तभी कर्तव्य मानते हैं आधुनिक भूप।
चाय के साथ हम करते थे वो प्यार की बातें। चाय के साथ हम करते थे वो प्यार की बातें।
हमने जौहर किया, जलाई खुद ही चिताये, कहो महल कैसा लगता हैं ? हमने जौहर किया, जलाई खुद ही चिताये, कहो महल कैसा लगता हैं ?
संतुलन से जीवन कामयाब हो जाता है। संतुलन से जीवन कामयाब हो जाता है।
आसमां में है सितारों का जहां जगमंगाने लगा जगमंगाने लगा। आसमां में है सितारों का जहां जगमंगाने लगा जगमंगाने लगा।
ना दुसरा कोई आ सका, और ना कोई आ सकेगा। ना दुसरा कोई आ सका, और ना कोई आ सकेगा।
बनाओ सहचरी अपनी प्रकृति को ज़रा। बनाओ सहचरी अपनी प्रकृति को ज़रा।
हमारे साथ वही होता है, जो हमारे भाग्य में लिखा होता है। हमारे साथ वही होता है, जो हमारे भाग्य में लिखा होता है।