Rajeev Namdeo Rana lidhori
Action Others
1
बनते जो मजदूर है,
वे कितने मजबूर ।
सबकुछ अपना छोड़ के,
घर से बेहद दूर ।।
2
मिले मजूरी जब उसे,
तब रोटी बन पाय।
जिस दिन गया न काम पर,
भूखा ही रह जाय।
बुंदेली दोहा-...
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संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती, ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती। संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती, ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती।
जीवन में बहुत कुछ खोते और बहुत कुछ पाते अपने आप को समझने लगी हूँ मैं। जीवन में बहुत कुछ खोते और बहुत कुछ पाते अपने आप को समझने लगी हूँ मैं।
हमारे लिए तो कहीं भी पानी की कहीं भी कमी नहीं थी। हमारे लिए तो कहीं भी पानी की कहीं भी कमी नहीं थी।
कोई इन्हें पहन नृत्यांगना कहलाता है तब क्यों कोई तवायफ का खिताब पाता है, कोई इन्हें पहन नृत्यांगना कहलाता है तब क्यों कोई तवायफ का खिताब पाता है,
तभी तो, मैं हर वक्त खुद को अकेला महसूस करती हूं। तभी तो, मैं हर वक्त खुद को अकेला महसूस करती हूं।
तन्हाई दूर कर उन्हें फिर बच्चे मिलेंगे, ये अनाथ बच्चे माता-पिता नये मिलेंगे। तन्हाई दूर कर उन्हें फिर बच्चे मिलेंगे, ये अनाथ बच्चे माता-पिता नये मिलेंगे।
देशभक्तों की कड़ी से कड़ी जोड़ने वाली है हिन्दी ।। देशभक्तों की कड़ी से कड़ी जोड़ने वाली है हिन्दी ।।
जब पैसा हुआ खत्म तो रिश्तेदारी भी खत्म। जब पैसा हुआ खत्म तो रिश्तेदारी भी खत्म।
तेरे हुस्न से मदहोश बना दिया तूने , तेरे जादू भरे मोह में मुझे लिपट लिया तूने , तेरे हुस्न से मदहोश बना दिया तूने , तेरे जादू भरे मोह में मुझे लिपट लिया तूने...
रिश्तों की कीमत तुझे जब तक समझ आएगी। तब तक जीवन में तुझे बहुत देर हो जाएगी। रिश्तों की कीमत तुझे जब तक समझ आएगी। तब तक जीवन में तुझे बहुत देर हो जाएगी।
ज्ञान के सारे रास्ते बंद कर दे और हर तरह से मजबूर कर दे । ज्ञान के सारे रास्ते बंद कर दे और हर तरह से मजबूर कर दे ।
दुष्टों के लिए काल प्रलाप भक्तों के लिए मीठी वाणी। दुष्टों के लिए काल प्रलाप भक्तों के लिए मीठी वाणी।
ओढ़ संध्या की चदरिया, उग रहे हैं अब सवेरे और धुंधले हो रहे हैं कल्पना के चित्र मेरे ओढ़ संध्या की चदरिया, उग रहे हैं अब सवेरे और धुंधले हो रहे हैं कल्पना के चित्...
ढूंढ रहा हूं मैं, एक जुगनू बनकर मैं बुझ गया, एक मुझसे अपनी परछाईं खोजने को कहीं गई ढूंढ रहा हूं मैं, एक जुगनू बनकर मैं बुझ गया, एक मुझसे अपनी परछाईं खोजने को क...
नाउम्मीदी में भी थोड़ी कोशिश कर लो मुश्किलों को जीतने की... नाउम्मीदी में भी थोड़ी कोशिश कर लो मुश्किलों को जीतने की...
एक दिन तो प्रेम मधु से निकलकर चुपचाप मिट्टी के तेल में बैठा मिला एक दिन तो प्रेम मधु से निकलकर चुपचाप मिट्टी के तेल में बैठा मिला
मेरी इच्छा के विरुद्ध , मेरे फैसले के विरुद्ध और मेरे अंतरमन के विरुद्ध। मेरी इच्छा के विरुद्ध , मेरे फैसले के विरुद्ध और मेरे अंतरमन के विरुद्ध।
अनचाहे कायर बन कर तुम क्यों पाप कर्म का हिस्सा बन जाते हो। अनचाहे कायर बन कर तुम क्यों पाप कर्म का हिस्सा बन जाते हो।
वहां हर शख्स व्यस्त दिखता पाने को मनवांछित परिणाम वहां हर शख्स व्यस्त दिखता पाने को मनवांछित परिणाम
देवताओं ने उद्धार हेतु की चरणकमलों में प्रार्थना देवताओं ने उद्धार हेतु की चरणकमलों में प्रार्थना