Rajeev Namdeo Rana lidhori
Action Others
1
बनते जो मजदूर है,
वे कितने मजबूर ।
सबकुछ अपना छोड़ के,
घर से बेहद दूर ।।
2
मिले मजूरी जब उसे,
तब रोटी बन पाय।
जिस दिन गया न काम पर,
भूखा ही रह जाय।
बुंदेली दोहा-...
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खुद ही सोच कर देखो अकेले तुम इतने सेवादारों को कैसे पाल पाओगे? खुद ही सोच कर देखो अकेले तुम इतने सेवादारों को कैसे पाल पाओगे?
ये दुनिया एक साप्ताहिक मेला-सरीखा है, ये दुनिया एक साप्ताहिक मेला-सरीखा है,
भारत के वीरों की, चमक रही अब शान है। भारत के वीरों की, चमक रही अब शान है।
बड़ा ही सुकून है कब्रिस्तान में। मौत के सन्नाटे है खामोशियां बहुत है।। बड़ा ही सुकून है कब्रिस्तान में। मौत के सन्नाटे है खामोशियां बहुत है।।
ये जहां है बस एक जगह, तेरे जीने के लिए। ये जहां है बस एक जगह, तेरे जीने के लिए।
बस यही तक है जिंदगी की दास्तान कि, मैं अपनों से नहीं अपने आप से लड़ती हूं। बस यही तक है जिंदगी की दास्तान कि, मैं अपनों से नहीं अपने आप से लड़ती हूं।
सब लेते हैं सर्दियों के मजे पर बहू की दो आंखें इक कतरा धूप को तरसतीं हैं। सब लेते हैं सर्दियों के मजे पर बहू की दो आंखें इक कतरा धूप को तरसतीं हैं।
महज़ एक हिस्सा बन कर रह जाएगा और कुछ नहीं. महज़ एक हिस्सा बन कर रह जाएगा और कुछ नहीं.
ठुमक ठुमक जब चले, पायल करती है शोर, ठुमक ठुमक जब चले, पायल करती है शोर,
चिनार साग देवदार ओक सेलम तरह-तरह के पेड़ होते जो प्राकृतिक खनिज संपदा से भरपूर होते। चिनार साग देवदार ओक सेलम तरह-तरह के पेड़ होते जो प्राकृतिक खनिज संपदा से भरपूर ह...
पर हिन्दू न थका न रुका , धर्म पंथ पर चलता चला गया पर हिन्दू न थका न रुका , धर्म पंथ पर चलता चला गया
अब अधर्म-अपकर्म-अन्याय-अविचार-अविश्वास की कोई गुंजाइश नहीं. अब अधर्म-अपकर्म-अन्याय-अविचार-अविश्वास की कोई गुंजाइश नहीं.
बहन चाहिए बेटी चाहिए गर्ल फ्रेंड भी चाहिए फिर क्यों नारी शक्ति नहीं चाहिए, बहन चाहिए बेटी चाहिए गर्ल फ्रेंड भी चाहिए फिर क्यों नारी शक्ति नहीं चाहिए,
जिस दिन उनके अपमान से थक जाते है, वो टूटने होते है । जिस दिन उनके अपमान से थक जाते है, वो टूटने होते है ।
शाम में अवध और सुबहे बनारस जैसे मन को भाता है शाम में अवध और सुबहे बनारस जैसे मन को भाता है
ढले आचरण में जब भावुक सा, ये उर का दीपक जल जाएगा । ढले आचरण में जब भावुक सा, ये उर का दीपक जल जाएगा ।
बेक़ाबू ग़ुस्से में पायलट पे बरस गये बेक़ाबू ग़ुस्से में पायलट पे बरस गये
कल हो न हो में परम् विश्वास रखती हूं, जो पल मेरे सामने है उसे भरपूर जीती हूँ, कल हो न हो में परम् विश्वास रखती हूं, जो पल मेरे सामने है उसे भरपूर जीती ...
उसी हवेली के नीचे घंटों इंतजार करवाया जिसकी हर मंजिल को हमीं ने मीनार बनाया उसी हवेली के नीचे घंटों इंतजार करवाया जिसकी हर मंजिल को हमीं ने मीनार बनाया
अपने-अपने रास्ते निकल पड़ते हैं अपने-अपने रास्ते निकल पड़ते हैं