Rajeev Namdeo Rana lidhori
Action Others
1
बनते जो मजदूर है,
वे कितने मजबूर ।
सबकुछ अपना छोड़ के,
घर से बेहद दूर ।।
2
मिले मजूरी जब उसे,
तब रोटी बन पाय।
जिस दिन गया न काम पर,
भूखा ही रह जाय।
बुंदेली दोहा-...
ग़ज़ल-रुला दे...
ग़ज़ल- कहां ख...
विश्व मजदूर द...
ग़ज़ल
हिन्दी दोहे- ...
-हनुमान जन्मो...
हाइकु कविता
ग़ज़ल- साथ ज़...
मेरे दोस्त ना...
अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।। अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।।
एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वार किए एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वा...
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अपनी दे दे यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अ...
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया। कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया।
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ, पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ,
बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है
कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं। कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं।
इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, कहलाते तुम इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, ...
विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत टकराव नही विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत ...
सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प्यार के सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प...
स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है। स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है।
संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख दिए होंगे संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख द...
जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे
अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है। अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है।
हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता