Rajeev Namdeo Rana lidhori
Action Others
1
बनते जो मजदूर है,
वे कितने मजबूर ।
सबकुछ अपना छोड़ के,
घर से बेहद दूर ।।
2
मिले मजूरी जब उसे,
तब रोटी बन पाय।
जिस दिन गया न काम पर,
भूखा ही रह जाय।
बुंदेली दोहा-...
ग़ज़ल-रुला दे...
ग़ज़ल- कहां ख...
विश्व मजदूर द...
ग़ज़ल
हिन्दी दोहे- ...
-हनुमान जन्मो...
हाइकु कविता
ग़ज़ल- साथ ज़...
मेरे दोस्त ना...
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्यों ढूंढे ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्य...
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात ना होती है ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात न...
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
है महाशिवरात्रि हम मनाते मान के साक्षी महादेव और हमारी माता पार्वती के विवाह को है महाशिवरात्रि हम मनाते मान के साक्षी महादेव और हमारी माता पार्वती के विवाह को
राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी। राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी।
मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे के सर आयी, मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे क...
बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा, ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा,
चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
"अखण्ड" मानवता का सम्यक परिचय करवाया... मैं उन सब का सदैव ऋणी हूँ "अखण्ड" मानवता का सम्यक परिचय करवाया... मैं उन सब का सदैव ऋणी हूँ
अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।। अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।।
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी। आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी।
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।
लेकिन मैं था ढीठ बड़ा, अपने बल पर रहा खड़ा मैंने अब भी ज़िद ना छोड़ी, सीना ताने रहा अड़ा लेकिन मैं था ढीठ बड़ा, अपने बल पर रहा खड़ा मैंने अब भी ज़िद ना छोड़ी, सीना ताने र...