वीर जवान
वीर जवान
जब जब भारत माँ पर
कोई संकट आन पड़ा,
रूप लिए रणचंडी हर
सैनिक सीना तान खड़ा,
वीर पुत्र से ही सदा माता
का है मान बड़ा,
जो घायल होकर भी देखो
रण अविराम लड़ा।
जिसने अपने लहू से सींचा
अपनी केसर घाटी को,
उसने चंदन बना दिया
अपनी भारत माटी को,
वीर जवानों अब तोड़ भी डालो
देशद्रोह की लाठी को,
आतंक का शमशान बना दो
अपनी केसर घाटी को।
इन जयचन्दों को झोंक दो
अब देश-प्रेम की ज्वाला में,
देश विरोधी नारे यदि
अब गूँजें किसी शाला में,
शीश काट के लटका दो
अब महाकाल की माला में।
