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Punit Singh

Drama

5.0  

Punit Singh

Drama

विदाई

विदाई

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तेरी इस बात ने खोल दिया वो पन्ना फिर से,

छँट गयी उस किताब से धूल और याद आया वो क़िस्सा फिर से।

कुछ पाने कुछ खोने की बात, याद आने और रोने की बात,

लगाया था हिसाब इनका, कटे थे वो लम्हे वो दिन वो साल,

फिर से ये पल हिसाब लगते कट जाएँगे।


हिसाबों में हिसाब तो नया है, पर जवाब वही है,

नया है रोवाब, पर सवाल वही है, और ख़्वाब वही है।

इन पन्नों में जुड़ रहा है,उस क़िस्से सा एक और क़िस्सा,

कहानी वही है, किरदार वही है, बस एक शख़्स नया है, और एक शख़्स वही है।

आती थी नींद इस वक़्त ख़ुद को ये झूठ समझते हुए देर से,

आज भी देर से ही सही, पर शायद सो जाएँगे।


बदलता तो नहीं इतनी जल्दी वक़्त भी, जितनी जल्दी वो इंसान बदल गए,

आप भी क्या ख़ूब ठहरे, उनके नक़्श-ए-क़दमों पर अपनी पहचान बदल गए।

आप ही की तरह थे वो इंसान बहुत ही प्यारे और नेक, एक मुखौटा क्या मिला,

मुखौटे के पीछे से जला दी हमारी चिता, और जाते जाते हमारी जलती चिता का शमशान बदल गए।

इन शब्दों की तरह ही ये लम्हे इन पन्नों में सिमट जाएँगे।


कल को तू जुदा हो जाएगी, देखते ही देखते विदा हो जाएगी,

जी चाहता है रोक लूँ तुझे जाने से, कुछ ऐसा करूँ कोई रोक ना पाए मुझे तुझको अपना बनाने से।

क्या करें, नसीब हम दोनों का ही खोटा है, हमारा साथ बहुत ही छोटा है,

तुझे अपनाएंगे तो मर जाएँगे, और जाने देंगे तो जी ना पाएँगे,

हाल-ए-सूरत जो भी हो इस दिल की, तेरी विदाई में जरूर आएँगे।


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