STORYMIRROR

Rajiv Jiya Kumar

Abstract Inspirational Others

4  

Rajiv Jiya Kumar

Abstract Inspirational Others

वह फ़रिश्ता।

वह फ़रिश्ता।

1 min
222

वह एक फ़रिश्ता 

उससे जन्मों का अनकहा रिश्ता 

छोड़कर घर द्वार सब अपना

सजाए था वह कई सपना

जमात को था जमा रखना

कर कर्म सब जो जज्ब 

दिल दिमाग में था उसके दफन

ठान लिया उसने हटे हर हाल में

मानवता के सिर से कफन।।


खोले मुँह अपना विकराल 

नर्तन कर रहा था काल 

हर बगलगीर परेशान बेहाल 

लाल वह सच्चा माटी के अपने

लगा जोर जगा दिए जीवन के सपने

भूल गया वह दिन और रात 

जहाँ यम का लगा था घात 

कह गया छोड़ दो गम की बात।।


छूट रही थी वक्त की सबसे यारी

चक्र अराति की बन रही थी भारी

थी निर्वाण से लुका छिपी जारी

उसकी बारी जब से थी आई

लड़ी उसने वह कड़ी लड़ाई

जो सत्य समाधान लेकर आई

उसका उद्धम गया न खाली

श्वेत चेहरों पर छाई फिर लाली।।


सुन लो जो कह जाए वह

बचने बचाने का इक राह यह

न हो कोताही, बरतनी है सावधानी

चुप से सह लो उसकी फटकार 

देव का दूत अपना वह डॉक्टर 

देव का दूत अपना वह डॉक्टर।।

            


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract