STORYMIRROR

Shristy Jain

Classics

2  

Shristy Jain

Classics

वह दिन !

वह दिन !

1 min
168

दिल की तमन्नाए जब पूरी होती है,

जज्बात दिल के जब शब्दों में तब्दील होते हैं।


मिलता है सुकून, मिटती है सारी रंजिशें

बन जाती हूं मैं एक आजाद परिंदा।


करता है मन आसमान को छूने का,

सितारों की तरह चमकने का।


आएगा वह दिन भी जब रहेगा

रूतबा सिर्फ मेरे ही नाम का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics