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Mamta Rani

Abstract Classics

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Mamta Rani

Abstract Classics

मुस्कान तुम्हारी

मुस्कान तुम्हारी

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मधुर मीठी मुस्कान तुम्हारी, तुझसे कोई प्यारा नहीं

इस बेगानी दुनियां में कान्हा तुमसे कोई न्यारा नहीं


जब -जब पीड़ उठे हृदय में, तूमने ही संभाला है

इस जग में सबसे बड़ा, तुझसा कोई सहारा नहीं


समय कभी ऐसा ना आये, इक छन्न में भी तुम न हो

हृदय में बस तुझको बिठाया, दिल से कभी उतारा नहीं


शक्ति भी तुम भक्ति भी तुम, तुम ही सारा संसार हो

समय कभी ऐसा ना गुजरा,जिस पल तुझको पुकारा नहीं


 प्रेम ,भरोसा ',ममता'और विश्वास, तुझमें ही समाहित है

करले जो विश्वास तेरे पे, वो कभी भी जग से हारा नहीं।


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