STORYMIRROR

Sirmour Alysha

Romance Classics

4  

Sirmour Alysha

Romance Classics

सुहाना सावन

सुहाना सावन

1 min
260

सावन की सुहावनी काया

हरे हरे शबनम में समाया

मन्नतें महादेव से हैं दिल गाया

शज़र रुत मन मग़्न असीम माया


बारिशों की झिमझिम अंगड़ाईयां 

है इसी दिवस की पुरवाईयां

बहके बहके सुहावने सावन

लहलहाते भिगे से क्यारियाँ


बदरी से हर आँगन महकाया

नाथ के जट्टा से ज़मी भिगाया

अलग सा एहसास फ़ज़ा से

बदलते मौसम सावन आया


डाली डाली झुला सजाया

सखी संग रास बड़े रचाया

है सुहाना दिवस शिव के नाम

थम थम बरसे जो सावन लुभाया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance