STORYMIRROR

Kavita Verma

Romance

4  

Kavita Verma

Romance

वह बंद मकान

वह बंद मकान

1 min
227

गली के मुहाने पर

बंद सा एक मकान

अपनी खामोश उदासियों

में भीगा सा 

जाने क्यूँ पुकारता

रहा मुझे 

बरसों पहले 

उसके बंद कपाटों से

आती महक 

तेरा जिक्र होते ही फिर छा गयी। 


गली के मुहाने पर 

बंद मकान की 

एक छोटी खिड़की 

अपनी बंद आँखों से देखती है मुझे 

उसकी नजरों में अटका 

वह स्नेहिल कतरा 

आज भी नमी छोड़ता है 

मेरी आँखों में 

जब उसे देखकर 

तेरा चेहरा दिखाई देता है। 


गली के मुहाने पर 

बंद से मकान के 

उस उदास आँगन में 

सूखा उजाड़ तुलसी चौरा 

आज भी बाँधता है 

मर्यादा की वह रेखा 

और लौट आता हूँ मैं 

एक नजर देखकर 

कि बंद मकान की

रुसवाइयों में 

तेरा नाम गवारा नहीं है मुझे। 


लेकिन फिर भी 

बंद गली के मुहाने पर 

खड़ा वह मकान 

तेरे होने न होने के बीच 

एक आस बंधाता है। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance