वे भी आंखें भिगोते थे
वे भी आंखें भिगोते थे
मेरी कमजोरी का
फायदा उठाते थे।
खुशी से सह लेता था मैं
और वे जुल्म पे जुल़म ढाते थे।
शायद कभी समझेंगे
वे मेरी दिल की गहराइयों को,
तन्हाइयों में अक्सर
यही सोच कर अश्क बह जाते थे।
लाख कोशिशों के बावजूद भी
महफिलों में हम तन्हा रह जाते थे।
मेरी कमजोरी का वो
फायदा उठाते थे।
दिलो जान से वह मुझ पर
मरते थे,
हद से भी ज्यादा मुझसे
प्यार करते थे,
फिर भी जख्म देते थे
याद कर कर अक्सर
तन्हाइयों में वह भी
आंखें भिगोते थे।
मेरी कमजोरी का
फायदा उठाते थे।

