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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

4.5  

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

वैलेंटाइन बनाम बसंतोत्सव

वैलेंटाइन बनाम बसंतोत्सव

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14 फरवरी को रहे मना वैलेंटाइन डे ,

बसंत पंचमी का दिन भी ये बाय द वे।

करें हम अपनी संस्कृति पर सदैव गर्व,

बसंतोत्सव मनाते हमारे पूर्वज थे खर्व।


बसन्तोत्सव एक दिनी नहीं दो माह का,

विष्णु कामरति मांशारदे के वन्दन का।

संयोग शुभ पड़ा शिक्षित करें नई पीढ़ी,

जीव-जगत सृष्टि का आगाज बन सीढ़ी।


प्राकृतिक वातावरण उछाह चेतन-चेतना,

त्रिगुण कर सम वसंतोत्सव उत्कर्ष अपना। 

अर्थ प्रधान युग में संवेदी भाव रहे कहां ?

पारखी नजर से, प्रकृति कौन झांके यहां?


कामकुंठित वासनारूप जग को सजा रहे,

वात्सायन कामसूत्र ,विदेशी कैसे भुना रहे।

दिखावे की जंग में प्रेम अस्तित्व है खो रहा,

अब विदेशी चोला पहन ये वैलेंटाइन हो रहा। 


स्नेह सरिता सूख मृगमरीचिका सी चमकती,

कोयल रसालबौर पल्लव कंक्रीट में खोजती।

रति खोजें काम, काम रति अभिलाषी हो रहे,

यौवनाकर्षण में अन्तर्भावसंवेदी प्रेम खो रहे।


हो सके एकबार अपनी घरनी को दे गुलाब, 

जीवन कुसुमित हो आंगन बन जायेगा द्वाब।

आगामी नयी फुलवारी लहलहा हर्षा जायेगी,

पुनः रति के काम को नवसांसें मिल जायेंगी।

        


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