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Sachhidanand Maurya

Drama

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Sachhidanand Maurya

Drama

उतना ही है प्यार प्रिये

उतना ही है प्यार प्रिये

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बीतेंगे ए दिन आएंगे फिर से बहार प्रिये,

कुछ दिन बस करना है और इंतजार प्रिये,

फिर अपना मधुर मिलन होगा कुछ ऐसा,

सांसों में सांसें, होगा बाहों का हार प्रिये।


कर सकती जुदा कैसे हमको ये भौतिक दूरी,

प्यार नहीं कम होगा चाहे जो हो अब मजबूरी,

फिर तुम्हारे ऑंखों की कोर्ट मैं दूँगा वो अर्जी,

फिर मुस्कानों संग देना मुझको अपनी मंजूरी,


धूप तुम्हे न धुल दे कम्बख्त अपनी गर्मी बतलाकर

चाँद उसे चिढ़ाता रहता अपनी शीतलता शर्माकर,

पीछाकर छुप जाता है तुमसे दूर कहीं वो जाकर,

फिर से हम दोनों खुश होंगे फिर चमकेंगें आकर।


रोको जज्बातों को पगली मौसम बदल जाने दो,

बुरे वक्त के सनकी सूरज को बस ढल जाने दो,

फिर तेरा दामन होगा फिर उसमें सर मेरा होगा,

तो उस बेशकीमती पल खातिर ये पल जाने दो।


सह लेने दो कुछ दिन इसकी मार प्रिये,

फिर जी भर कर लेना तुम श्रृंगार प्रिये,

फिर चाँदनी तले प्रेम पुष्प की वर्षा होगी,

फिर जाल बिछाएंगे दो दिलों के तार प्रिये।


नहीं हुआ है कम तारीफ़ों के अशआर प्रिये,

नहीं हुआ है कम तुम्हारे हुस्न का खुमार प्रिये,

क्या कभी बंध पाया है सीमाओं के बंधन में,

जितना तुमसे तब था उतना ही है प्यार प्रिये।


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