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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

उसका गम

उसका गम

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उसका गम मुझे भुलाने नही देता है,

उसका प्यार कहीं जाने नहीं देता है।


पहले न समझ पाया था दूरियों को,

अब यादों का रेला जीने नही देता है।


उसके आंसूओं से कहीं बड़कर मेरा गम है,

लेकिन मेरे प्यार से कहीं बड़कर उसका हम है।


वो किसी और से दिल लगा बैठे हैं मुझे छोड़कर,

फिर भी मुझे उससे प्यार है कि अब वो खुश है।


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