STORYMIRROR

Sonnu Lamba

Drama

3  

Sonnu Lamba

Drama

उम्र ही तो है...

उम्र ही तो है...

1 min
269

जिंदगी के थपेडे बहुत निर्मोही होंते है

लील जाते हैं बेपरवाह हंसी

इंच इंच कम होती है मुस्काने

सांसे फिर भी संभाले रखती हैं भार

जिंदा दिखने का


अब कौन जाने

जीने का मतलब सांसो का चलना नहीं

देह समूची दिखती है सामने से

मन भीतर ही भीतर किरचो में पड़ा रहता है


ये भाप लेंना भी हर किसी को नहीं आता

धरती पर जन्म लेना ही किसी भी अपेक्षा से परे है

भूल क्यूं नहीं जाते उन्हे , जो चीजें सूकून देती हैं

समय ही तो है उम्र ....कट ही जानी है एक दिन।

©®sonnu lamba


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama